फरीदाबाद। धौज स्थित अलफलाह यूनिवर्सिटी में नवंबर 2025 में आतंकी माड्यूल के पर्दाफाश के बाद सबसे बड़ा बदलाव भर्ती प्रक्रिया में देखने को मिला है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने अब साफ कर दिया है कि किसी भी नए कर्मचारी को रखने से पहले उसका पुलिस वैरिफिकेशन कराया जाएगा।

खासकर संवेदनशील विभागों और अस्पताल से जुड़े पदों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में थर्ड और फोर्थ क्लास पदों पर नई भर्तियां पुलिस वैरिफिकेशन के बाद की गई हैं। वहीं अब यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, जूनियर रेजिडेंट्स, ट्यूटर और कैजुअल्टी मेडिकल आफिसर पदों के लिए भी आवेदन मांगे हैं।

इन सभी पदों पर पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी

इन सभी पदों पर पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही भर्ती की जाएगी। जांच एजेंसियों द्वारा मेडिकल और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों के नाम सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली, स्टाफ चयन प्रक्रिया और आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल उठे थे।

इसके बाद यूनिवर्सिटी का संचालन सरकार ने अपने हाथ में ले लिया है। आइएएस अमित अग्रवाल को यूनिवर्सिटी का प्रशासक नियुक्त किया गया है। उनके नेतृत्व में गठित कमेटी पूरा संचालन संभाल रही है। इसी कमेटी ने कैंपस की व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं।

विभिन्न विभागों से जुड़े 50 से अधिक कर्मचारी नौकरी छोड़कर चले गए थे। नई नियुक्तियों से साफ है कि प्रशासन कैंपस की शैक्षणिक और मेडिकल गतिविधियों को सामान्य करने की कोशिश में जुटा है। पुलिस ने भी यूनिवर्सिटी में पुलिसकर्मियों की नियमित तैनाती की है।

वेबसाइट पर चमक रहा जेल में बंद चेयरमैन का चेहरा

यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर अब भी जेल में बंद चेयरमैन को चेहरा चमक रहा है। यूनिवर्सिटी की वेबसाइट में महज प्रशासक, कुलपति और रजिस्ट्रार के नाम बदले गए हैं। अलफलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अहमद जवाद सिद्दीकी और तत्कालीन राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की छात्रों व स्टाफ के साथ फोटो सबसे ऊपर खुलती हैं।

वेबसाइट पर दिखाई दे रहे अधिकतर फोटो में चेयरमैन की मौजूदगी है। वेबसाइट पर वर्तमान प्रशासक, कुलपति या रजिस्ट्रार की तरफ से काेई संदेश भी नहीं है।

यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ.अजय रंगा का कहना है कि नई वेबसाइट बनाने का काम शुरू कर दिया है, वह पहले से मौजूद वेबसाइट से अलग होंगी। उन्होंने बताया कि जांच एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी की वर्तमान वेबसाइट में छेड़छाड़ करने से मना किया हुआ है, इसलिए इन पर अभी पुरानी जानकारियां दिखाई दे रही हैं।

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