करनाल, 16 मई। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा द्वारा गुरु-शिष्य परंपरा प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत लुप्त होती विधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जिला से गुरुओं एवं उनके शिष्यों की सूची मांगी गई है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश की पारंपरिक लोक कलाओं, संगीत, वादन, नृत्य एवं अन्य सांस्कृतिक विधाओं को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी सत्यवान महिवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज से प्राप्त पत्र के अनुसार ऐसे गुरुओं का विवरण उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं, जो लुप्त होती विधाओं का प्रशिक्षण दे रहे हैं। विद्याओं में पारंगत प्रशिक्षक अपना आवेदन नाम, पता एवं दूरभाष नंबर सहित अन्य विवरण जिला सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी करनाल के कार्यालय कमरा नंबर 19, द्वितीय तल, लघु सचिवालय सेक्टर-12 में जमा करवाएं। चयनित गुरु, संगतकार एवं शिष्यों को विभाग की ओर से प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। योजना के तहत गुरु को 7,500 रुपये प्रतिमाह, प्रत्येक संगतकार को 3,750 रुपये प्रतिमाह तथा प्रत्येक शिष्य को 1,500 रुपये प्रतिमाह की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी सत्यवान महिवाल ने बताया कि जिला में कार्यरत लोक कलाकार, गुरु एवं सांस्कृतिक संस्थाएं इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने विवरण जल्द से जल्द उपलब्ध करवाएं, ताकि पात्र व्यक्तियों की सूची विभाग को भेजी जा सके। उन्होंने कहा कि यह योजना भारत सरकार की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे पारंपरिक कलाओं को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने आमजन से भी अपील करते हुए कहा कि यदि किसी क्षेत्र में लोक कला, लोक संगीत, लोक नृत्य अथवा अन्य पारंपरिक विधाओं के अनुभवी गुरु कार्यरत हैं तो उनकी जानकारी विभाग तक पहुंचाने में सहयोग करें। विभाग द्वारा इस संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक कलाकार इस योजना से लाभान्वित हो सकें।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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