चंडीगढ़। हरियाणा की जिला अदालतों में अभियोजन व्यवस्था की गंभीर कमी पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को बड़ा प्रशासनिक झटका दिया।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जिला अदालतें कानून अधिकारियों की “भारी कमी” से जूझ रही हैं, जिससे आपराधिक मामलों की सुनवाई और ट्रायल बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों में प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए 285 जिला अटार्नी, डिप्टी जिला अटार्नी और सहायक जिला अटार्नी को तत्काल प्रभाव से वापस बुलाकर एक सप्ताह के भीतर जिला अदालतों में तैनात किया जाए।

सरकार के हलफनाने का किया रिव्यू

चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे की समीक्षा के दौरान पाया कि प्रशिक्षित कानून अधिकारियों की बड़ी संख्या अदालतों की बजाय गैर-न्यायिक कार्यों में लगाई गई है, जबकि निचली अदालतों में अभियोजन पक्ष की रीढ़ माने जाने वाले अधिकारियों का गंभीर अभाव बना हुआ है।
अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस स्थिति ने न्यायिक प्रक्रिया को बाधित कर दिया है और मुकदमों के निस्तारण में अनावश्यक देरी हो रही है। खंडपीठ ने कहा कि जब जिला न्यायालयों में लंबित आपराधिक मामलों का दबाव लगातार बढ़ रहा हो, तब कानून अधिकारियों को विभागीय कार्यों में लगाना न्यायिक व्यवस्था के हितों के विपरीत है।

644 पदों वाले अभियोजन ढांचे में बड़ी संख्या रिक्त

अदालत ने साफ किया कि सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया जारी होने या नए विज्ञापन जारी करने जैसे तर्क तत्काल राहत का विकल्प नहीं हो सकते। मौजूदा संकट को देखते हुए उपलब्ध मानव संसाधन को पहले न्यायालयों में लगाया जाना आवश्यक है।अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, स्वीकृत 644 पदों वाले अभियोजन ढांचे में बड़ी संख्या या तो रिक्त है अथवा अधिकारी प्रतिनियुक्ति के कारण न्यायिक कार्य से बाहर हैं।

इस पर अदालत ने निर्देशित किया कि सभी 285 प्रतिनियुक्त कानून अधिकारियों की डेपुटेशन समाप्त कर उन्हें अलग-अलग जिलों में अदालत संबंधी कार्य के लिए भेजा जाए।साथ ही हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत समन्वित हलफनामा भी मांगा है, जिसमें सभी संवर्गों की कुल स्वीकृत संख्या, वर्तमान कार्यरत संख्या, जिला-वार रिक्तियां तथा रिक्त पदों को भरने के लिए उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा देना होगा।

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