महाराणा प्रताप मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश के एक महान शासक, अदम्य योद्धा और राष्ट्रभक्त थे, जिन्होंने मातृभूमि भारत की स्वतंत्रता के लिए अकबर की अधीनता स्वीकार करने के बजाय आजीवन संघर्ष चुना। 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ में जन्मे प्रताप ने हल्दीघाटी के युद्ध में सीमित संसाधनों के साथ विशाल मुगल सेना का सामना किया। यह विचार महाराणा प्रताप की 486 वीं जयंती के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित शौर्य संवाद कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े अनेक प्रेरणादायक प्रसंगों पर संवाद किया।
मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने शौर्य संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा महाराणा प्रताप  का अद्वितीय साहस,मातृभूमि के प्रति समर्पण और विपरीत परिस्थितियों में भी कभी न झुकने का संकल्प हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन हमें राष्ट्रहित, स्वाभिमान और धर्म की रक्षा हेतु सदैव दृढ़ रहने का संदेश देता है। हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के शौर्य के साथ उनके प्रिय घोड़े चेतक का नाम भी अमर हो गया, जिसने 26 फीट चौड़ी नदी को अपनी घायल अवस्था में पार कर अपने स्वामी के प्राणों की रक्षा की और प्राण त्याग दिए। आज भी इस स्थान पर चेतक का स्मारक स्थित है।

डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा महाराणा प्रताप के लिये यह सिंहासन और ताज कांटों से भरा था, समय समय पर मुगलों के आक्रमण और अनेक राजपूत राजाओं द्वारा अकबर की अधीनता स्वीकार करने से परिस्थितियों की क्षमता बढ़ रही थी। लेकिन उन्होंने इन विषम परिस्थितियों में भी मातृभूमि की रक्षा का संकल्प लिया। महाराणा प्रताप ने प्रतिज्ञा की थी कि जब तक मैं शत्रुओं से अपनी पावन मातृभूमि को मुक्त नहीं करा लेता तब तक न तो मैं महलों में रहोगे, न शैय्या पर सोऊंगा और न सोने चांदी अथवा किसी धातु के पात्र में भोजन करूंगा। वृक्षों की छांव ही मेरा महल, घास ही मेरा बिछौना और पत्ते ही मेरे भोजन करने के पात्र होंगे। महाराणा प्रताप न केवल इतिहास में अमर रहेंगे बल्कि वह युगों तक हर राष्ट्र प्रेमी के ह्रदय में एक प्रेरणा के रूप में जीवित रहेंगे।
कार्यक्रम में समाजसेवी धर्मवीर एवं समाजसेविका श्रीमती पूनम देवी बतौर अतिविशिष्ट अतिथि उपस्थित रहकर शौर्य संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के सदस्य, विद्यार्थी आदि उपस्थित रहें। कार्यक्रम का राष्ट्रीय गीत वन्देमातरम से हुआ।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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