चंडीगढ़। हरियाणा के चरखी दादरी में कथित अवैध खनन और पर्यावरण उल्लंघनों पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला मजिस्ट्रेट-सह-डिप्टी कमिश्नर, चरखी दादरी को स्पष्ट निर्देश दिए कि संबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध खनन न होने दिया जाए।

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) से कम रैंक के अधिकारी को जिम्मेदारी न सौंपने का निर्देश देते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी स्वयं मौके का निरीक्षण कर शपथपत्र सहित विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करे।
यह आदेश जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने विजय एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि निजी पक्ष को दी गई माइनिंग लीज जनवरी 2026 में समाप्त हो चुकी है, लेकिन लीज नवीनीकरण न होने के बावजूद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां जारी हैं।

हाईकोर्ट ने मामले को माना गंभीर

इस पर हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला प्रशासन को सीधे जवाबदेह ठहराया।खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्तर पर अवैध खनन न हो।

अदालत ने साथ ही स्पष्ट किया कि केवल औपचारिक जवाब पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जिम्मेदार अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से स्थल निरीक्षण कर तथ्यात्मक स्थिति अदालत के समक्ष रखनी होगी।मामले की अगली सुनवाई अब 15 जुलाई को होगी, जहां इसे संबंधित दूसरी याचिका के साथ सुना जाएगा।

संबंधित याचिका में चरखी दादरी के अरावली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय क्षति और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का मुद्दा भी उठाया गया है। पूर्व सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट राज्य सरकार के रवैये पर तीखी टिप्पणी कर चुका है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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