खेलो इंडिया में करनाल की बेटी रिद्धि फोर ने गोल्ड मेडल की तरफ कदम बढ़ा दिया है। रिद्धि अपनी बेहतरीन फॉर्म में है। उसने बुधवार को हुए पहले ही मुकाबले में फर्स्ट रैंक हासिल कर अपने प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ दिया। जिसके बाद शहर वासियों में उम्मीद है कि गोल्ड आने वाला है।

मध्यप्रदेश के जबलपुर में रानी ताल स्टेडियम में तीरंदाज रिद्धि फोर अपने टारगेट बोर्ड और गोल्ड मेडल पर निगाहे जमाए हुए है। पहले मुकाबले में रिद्धि ने अपने प्रतिद्वंद्वी से 15 अंक की बढ़त बनाए रखी, रिद्धि ने 654 अंक का स्कोर बनाया। अब आज रिद्धि टारगेट बोर्ड पर फिर से निशाना साधेगी। अगर रिद्धि ने इसी तरह का प्रदर्शन किया तो गोल्ड रिद्धि से दूर नहीं।

पिता बने कोच और रिद्धि बनी शागिर्द
पिता ने उस वक्त रिद्धि के हुनर को पहचान लिया था, जब वह महज आठ वर्ष की थी। रिद्धि ने तीरंदाजी की दुनिया में अपना कदम रखा और ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। चूंकि आसपास के एरिया में कोई कोच नहीं था तो पिता मनोज ने खुद गुरुग्राम में कोचिंग ली और फिर रिद्धि को धनुष पकड़ना सिखाया।

रिद्धि ने धनुष बाण को इस कदर संभाला कि अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडलों को अपनी झोली में डाला और अपने अभिभावकों का नाम राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। 15 साल की उम्र में ही इंटरनेशनल लेवल पर रिद्धि ने पहचान बनाई।

रिद्धि फोर की फाइल फोटो।
रिद्धि फोर की फाइल फोटो।

10 इंटरनेशनल और 56 मेडल किए अब तक आपने नाम
नेशनल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिद्धि अपनी प्रतिभा के जौहर दिखाती हुई आगे बढ़ी और छोटी ही उम्र में 10 इंटरनेशनल और 56 नेशनल मेडल अपने नाम कर लिए। जिसके बाद रिद्धि ने सीनियर निशानेबाजी के कॉम्पिटिशन में भी हिस्सा लिया और मेडल भी जीते। करनाल के गुरु नानक खालसा कॉलेज के बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा रिद्धि खेलो इंडिया में लास्ट बार हिस्सा लेने वाली है।

रिद्धि ने वर्ष 2014 में तीरंदाजी शुरू की थी।

1. वर्ष-2014 में अंडर-14 में आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में गोल्ड मेडल।

2. वर्ष-2015 में विशाखापट्नम में दो ब्रॉन्ज, अंडर-18 में सिल्वर और ब्रॉन्ज।

3. वर्ष 2016 में आंध्र प्रदेश के तिरुपति में तीन गोल्ड।

4. उड़ीसा भुवनेश्वर में अंडर-17 के मुकाबले में दो गोल्ड व दो सिल्वर, स्कूल नेशनल गेम्स में चार गोल्ड व एक सिल्वर।

5. वर्ष 2016-17 में महाराष्ट्र में मेडल, फरीदाबाद में सीनियर नेशनल तीरंदाजी में ब्रॉन्ज मेडल।

6. वर्ष 2017-18 में स्कूल नेशनल गेम्स में दो गोल्ड, एक सिल्वर।

7. वर्ष 2018-19 में फिलीपींस एशिया कप में दो ब्रांज।

8. ताइवान में आयोजित मुकाबलों में सिल्वर व ब्रॉन्ज।

9. बांग्लादेश में आयोजित मुकाबलों में सीनियर सिल्वर मेडल।

​​​​​​खेलो इंडिया में भी रिद्धि की ख्याति
रिद्धि ने वर्ष-2018 में नई दिल्ली में आयोजित पहले खेलों इंडिया स्कूल गेम्स में आठवां, पुणे में चौथा, गुवाहाटी में कांस्य पदक, पंचकूला में स्वर्ण पदक मिला था।

बेटियों की उड़ान होती है बहुत ऊंची
मनोज बताते है कि उन्हें अपनी बेटी पर नाज है। रिद्धि उन लोगों के लिए उदाहरण है जो ये सोचते हैं कि बेटे ही खेलों में नाम रोशन कर सकते हैं और कही न कही अपनी बेटियों कर हुनर को दबा देते हैं, लेकिन जब बेटियों के सपनों के पंखों को उड़ान देंगे तो समझ में आएगा कि बेटियों की उड़ान बहुत ऊंची है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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