चंडीगढ़। हरियाणा की दो सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। भाजपा के राज्यसभा सदस्यों किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल पूरा होने पर खाली हो रही इन दोनों सीटों पर 16 मार्च को चुनाव होना है। राज्यसभा की दो सीटों पर तीन उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं, जिस कारण मुकाबला न केवल रोचक होगा, बल्कि क्रॉस वोटिंग की आशंका भी बलवती हो गई है।

हरियाणा में साल 2016 और साल 2022 के राज्यसभा चुनाव में दो बार खेला हो चुका है। कांग्रेस के पास विधायकों का पर्याप्त संख्याबल होने के बावजूद क्रॉस वोटिंग के चलते सत्तापक्ष यानी भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा व कार्तिकेय शर्मा चुनाव जीत चुके हैं।
इस बार भी कांग्रेस के पास अपने हिस्से की सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्याबल मौजूद है, लेकिन बड़ा सवाल यह पैदा हो रहा है कि पिछले इतिहास की तरह क्या तीसरी बार राज्यसभा के चुनाव में फिर भाजपा कोई खेल कर सकती है।

एक बीजेपी तो एक कांग्रेस को मिलेगी सीट

90 सदस्यीय विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर एक सीट भाजपा व एक सीट कांग्रेस के खाते में जानी तय है। भाजपा ने सोची-समझी रणनीति के तहत कांग्रेस के हिस्से वाली सीट पर अपने समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतार दिया है, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

भाजपा ने जिस निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को राज्यसभा के चुनावी रण में उतारा है, वे हरियाणा भाजपा के उपाध्यक्ष हैं और पूर्व में विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने गढ़ी सांपला किलोई से तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।

अब अगर सतीश नांदल भाजपा की रणनीति के हिसाब से कांग्रेस विधायकों को क्रॉस वोटिंग के लिए तैयार कर लेते हैं तो यह भूपेंद्र सिंह हुड्डा को तगड़ा झटका होगा। हालांकि विधानसभा सत्र के बाद पत्रकारों द्वारा पूछने पर हुड्डा ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस जीतेगी।

भाजपा ने करनाल के पूर्व सांसद संजय भाटिया को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिनका बिना किसी लाग-लपेट के राज्यसभा में जाना तय है। कांग्रेस के दलित संगठन में काम करने वाले अंबाला निवासी कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है।

हरियाणा में काम करने वाले एक सीनियर दलित आईएएस अधिकारी ने कर्मवीर बौद्ध को राज्यसभा का उम्मीदवार बनवाने में अहम भूमिका निभाई है। दलित नेता उदय राज और राजेंद्रपाल गौतम का करीबी होने का लाभ भी कर्मवीर को मिला है।

भाजपा कर्मवीर बौद्ध की इसी कमी का फायदा उठाने की फिराक में है कि अधिकतर कांग्रेस विधायक उनके नाम से खुश नहीं हैं। भाजपा ने राज्यसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए शनिवार को नई दिल्ली में हरियाणा के प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई है।

मुख्यमंत्री सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के साथ भाजपा के प्रभारी डा. सतीश पुनिया, सह प्रभारी सुरेंद्र नागर और प्रदेश अध्यक्ष मोहन बडौली समेत प्रमुख पदाधिकारी इस बैठक का हिस्सा होंगे, जो तय करेंगे कि किस तरह से 2016 व 2022 की रणनीति को साल 2026 में फिर से अंजाम दिया जा सके। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी इस प्रयास में जुट गए हैं कि उनका कोई विधायक राज्यसभा के चुनाव में क्रॉस वोटिंग के लिए तैयार न हो सके। इसके लिए उन्हें अपने विधायकों पर भरोसा है।

भाजपा ने गोपाल कांडा पर क्यों नहीं जताया भरोसा

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा खूब है कि भाजपा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में हरियाणा लोकहित पार्टी के अध्यक्ष एवं सिरसा के पूर्व विधायक गोपाल कांडा पर क्यों भरोसा नहीं जताया। गोपाल कांडा हरियाणा के गृह राज्य मंत्री भी रहे चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पार्टी एनडीए गठबंधन में सहयोगी है।

राज्यसभा के चुनाव में नामांकन से पहले गोपाल कांडा की केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल से वार्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली से मुलाकात हो चुकी थी।

उन्हें चुनाव के लिए तैयार रहने के लिए भी कह दिया गया था, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने महसूस किया कि गोपाल कांडा एनडीए का पार्ट हैं, उन्हें किसी दूसरे सांचे में फिट किया जा सकता है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की राजनीति को प्रभावित करने के लिए ऐसा प्रत्याशी सामने लाया जाए, जो जाट पॉलिटिक्स करता है और भाजपा का भरोसेमंद है।

इस सांचे में सतीश नांदल फिट बैठे। यह अलग बात है कि वे आज तक चार चुनाव लड़े और चारों हार गये। तीन चुनाव तो उन्होंने हुड्डा के हाथों ही हारे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भाजपा हाईकमान हुड्डा की राजनीति को उनके रोहतक जिले के तीर से ही भेदना चाहता है।

भूपेंद्र हुड्डा क्यों हैं कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध की जीत के प्रति आशान्वित

हरियाणा के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पसंद का उम्मीदवार भले ही राज्यसभा के चुनाव में नहीं उतारा गया है, लेकिन उनके चेहरे के भाव कह रहे हैं कि कांग्रेस उम्मीदवार की जीत को उतना खतरा नहीं है, जितनी आशंका जताई जा रही है।

इसका पहला कारण यह है कि रोहतक जिले के रहने वाले सतीश नांदल को हुड्डा कभी नहीं चाहेंगे कि वह चुनाव जीतें। इसके लिए उन्हें हर हाल में कर्मवीर बौद्ध के प्रति अपने कांग्रेस विधायकों को लामबंद रखना होगा। किसी कारण से यदि कर्मवीर बौद्ध चुनाव हार गये तो कांग्रेस हाईकमान खासकर राहुल गांधी के समक्ष गलत संदेश जाएगा। साथ ही यह संदेश भी जा सकता है कि दलित उम्मीदवार को मिलकर हरा दिया गया है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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