-महर्षि दयानंद सरस्वती ने शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा की समृद्धि के लिए दिया अतुलनीय योगदान
-उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती व स्वामी श्रद्धानंद की बलिदान शताब्दी पर आयोजित चतुर्वेद पारायण महायज्ञ में की शिरकत
कुरुक्षेत्र, 12 फरवरी। 
हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने हमें वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया था। वेदों में हर समस्या का समाधान समाहित है। हमारे महापुरुष इस बात को भलीभांति जानते थे। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि मजबूत शरीर और मजबूत मन ही राष्ट्र को महान बनाते हैं। यह कार्यक्रम हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान का जीवंत उत्सव है, जो महर्षि दयानंद सरस्वती के जयंती वर्ष को समर्पित है। महर्षि दयानंद सरस्वती ने शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा की समृद्धि के लिए अतुलनीय योगदान दिया। सामाजिक सुधार के उनके प्रयास देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज बने रहेंगे। महापुरुषों ने हमें आत्मविश्वास, अनुशासन, परिश्रम और आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाया है।
उपाध्यक्षा सुमन सैनी वीरवार को ब्रह्मसरोवर पर महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती व स्वामी श्रद्धानंद की बलिदान शताब्दी पर आयोजित चतुर्वेद पारायण महायज्ञ के समापन अवसर पर बोल रही थी। उपाध्यक्षा सुमन सैनी का हरियाणा योग आयोग के चेयरमैन जयदीप आर्य ने पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया।
उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हमारे बीच में योग ऋषि स्वामी रामदेव उपस्थित हैं। जिन्होंने योग को घर-घर पहुंचाने का विराट कार्य किया है। योग को प्रत्येक जन-जन की दिनचर्या का हिस्सा बनाया है। आज गांव का किसान हो या शहर का नागरिक, विद्यार्थी हो, युवा हो या वरिष्ठ नागरिक, हर कोई योग की शक्ति को पहचान रहा है। हरियाणा सरकार इस पुनीत प्रयास में पूर्ण सहयोगी है और आगे भी रहेगी। उन्होंने कहा कि खेलों में हरियाणा पहले ही देश का अग्रणी राज्य है। अब हमारा लक्ष्य है कि स्वास्थ्य और योग के क्षेत्र में भी हरियाणा राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक नेतृत्व स्थापित करे। योगासन को खेल के रूप में भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।
योग ऋषि स्वामी रामदेव ने कहा कि दयानंद सरस्वती ऐसे युग पुरुष थे, जिन्होंने सामाजिक कुरीति उन्मूलन, स्त्री शिक्षा को प्रोत्साहन, सामाजिक समरसता के लिए काम कर समाज सुधार की नई क्रान्ति का सूत्रपात किया। उन्होंने देश में स्वराज्य तथा आजादी की भावना को सुदृढ़ किया। उन्होंने कहा कि 19वीं शताब्दी में जब हम अपनी संस्कृति और आस्था को पश्चिमी संस्कृति के सामने कमतर समझते थे, तब स्वामी दयानंद सरस्वती ने हमें आत्मसम्मान और पुनर्जागरण का मार्ग दिखाया।
हरियाणा के पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने कहा कि दयानंद सरस्वती सामाजिक और आध्यात्मिक सुधार के निर्भीक योद्धा थे। उन्होंने शैक्षिक और सामाजिक सुधार, विशेषकर महिला सशक्तिकरण और अस्पृश्यता उन्मूलन के लिए प्रभावशाली उपाय किए। उनके कार्य आज भी भारतीय समाज और पूरे विश्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती एक महान भारतीय समाज सुधारक, विद्वान, और आध्यात्मिक नेता थे। महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, जाति प्रथा, और अन्य कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई।
वेद विद्या शोध संस्थान के अध्यक्ष स्वामी संपूर्णानंद ने कहा कि 12 फरवरी 1824 को जन्मे महर्षि दयानंद सरस्वती एक समाज सुधारक थे। उन्होंने उस समय व्याप्त सामाजिक असमानताओं का मुकाबला करने के लिए 1875 में आर्य समाज की स्थापना की। इसका उद्देश्य समाज में व्याप्त अंधविश्वास, जाति प्रथा, और अन्य कुरीतियों को दूर करना था। उन्होंने कहा कि आर्य समाज ने सामाजिक सुधारों और शिक्षा पर जोर देकर देश की सांस्कृतिक और सामाजिक जागृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस मौके पर नगर निगम मेयर रेणु बाला गुप्ता, जिला आयुष अधिकारी डा. मंजू शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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