– डॉ० सत्यवान सौरभ
आज, 8 फरवरी 2026 को हरियाणा सरकार के पूर्व वित्त मंत्री श्री जयप्रकाश दलाल का 70वां जन्मदिन है। यह अवसर केवल एक राजनेता के जन्मदिवस का नहीं, बल्कि उस जनसेवक के जीवन और कार्यों को स्मरण करने का है, जिसने लोहारू जैसे शुष्क और उपेक्षित क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया। डॉ. सत्यवान सौरभ के शब्द— “लोहारू में काम के, जेपी ही सिरमौर”— न केवल काव्यात्मक प्रशंसा हैं, बल्कि धरातल पर किए गए कार्यों की सच्ची अभिव्यक्ति भी हैं।
श्री जयप्रकाश दलाल का जन्म वर्ष 1956 में भिवानी जिले के लोहारू क्षेत्र में एक साधारण जाट परिवार में हुआ। ग्रामीण परिवेश, सीमित संसाधन और खेती-किसानी से जुड़ा जीवन उनके व्यक्तित्व की नींव बना। बचपन से ही उन्होंने श्रम, अनुशासन और सादगी को जीवन का हिस्सा बनाया। सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने केवल व्यक्तिगत उन्नति तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज की समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी माना। यही कारण रहा कि युवावस्था से ही वे सामाजिक कार्यों से जुड़े और ग्रामीण मुद्दों पर मुखर होकर काम करने लगे।
लोहारू क्षेत्र वर्षों तक पानी की कमी, खराब सड़कों, बिजली संकट और कृषि अव्यवस्था से जूझता रहा। ये समस्याएं उनके लिए राजनीतिक मुद्दे नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पीड़ा थीं, क्योंकि वे स्वयं इन्हीं परिस्थितियों में पले-बढ़े थे। उनकी यही जमीनी समझ उन्हें आम नेताओं से अलग बनाती है। डॉ. सौरभ का दोहा— “रह साधारण जो सदा, करते काम कमाल”— उनके जीवन पर बिल्कुल सटीक बैठता है। सत्ता में रहते हुए भी उन्होंने कभी दिखावे या अहंकार को अपने व्यवहार का हिस्सा नहीं बनने दिया।
वर्ष 2019 का विधानसभा चुनाव लोहारू के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में श्री दलाल ने भाजपा को पहली बार ऐतिहासिक जीत दिलाई। यह विजय केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं थी, बल्कि जनता के विश्वास की जीत थी। लोगों ने विकास, ईमानदारी और सुलभ नेतृत्व को चुना। चुनाव के बाद वे हरियाणा सरकार में कृषि मंत्री बने और बाद में वित्त मंत्री का महत्वपूर्ण दायित्व भी उन्हें सौंपा गया।
पारिवारिक जीवन में भी वे पारंपरिक मूल्यों के प्रतीक हैं। पत्नी बिमला देवी और पुत्र रोहित एवं आशीष के साथ उनका जीवन सादगीपूर्ण रहा। संपत्ति और पद के बावजूद उनका रहन-सहन आमजन जैसा ही रहा। उन्होंने सदैव यह संदेश दिया कि जनसेवा वैभव से नहीं, संवेदना से होती है।
कृषि मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने लोहारू और आसपास के क्षेत्रों की तस्वीर बदल दी। शुष्क भूमि में नहरों का पक्का होना और टेल तक पानी पहुंचना किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं था। “नहरों में पानी दिया, बिछा सड़क का जाल” केवल पंक्ति नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला परिवर्तन है। फिरणियों के पक्के होने से न केवल सिंचाई सुधरी, बल्कि गांवों की आंतरिक कनेक्टिविटी भी मजबूत हुई। तालाबों के सुधार से जल संरक्षण को बढ़ावा मिला और फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई— “पहुंचा पानी टेल पर, फसल हुई भरमार।”
गोकुलपुरा में अनाज अनुसंधान केंद्र, खरखड़ी-गिगनौ में बागवानी उत्कृष्टता केंद्र और इंदो-इस्राइल कृषि केंद्र की स्थापना ने क्षेत्र को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ा। बहाल और लोहारू में सब्जी मंडियों का निर्माण किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम था। फसल बीमा, मुआवजा और आर्थिक सहायता ने आपदा के समय किसानों को संबल दिया— “बीमा और मुआवजा, बांटा कई हजार।”
बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य हुए। गांवों में रोशनी पहुंची, कृषि पंपों को नियमित बिजली मिली और औद्योगिक संभावनाओं के द्वार खुले— “देकर बिजली है किया, अंधियारे का नाश।” सड़कों का जाल बिछा, गांवों की तस्वीर बदली और विकास का अहसास हर व्यक्ति तक पहुंचा।
वित्त मंत्री के रूप में 2023-24 के दौरान उन्होंने हरियाणा को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में कार्य किया। बजट में ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और पशुपालन को प्राथमिकता दी गई। पशुपालन और डेयरी विकास से किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर रहा। मत्स्य पालन को प्रोत्साहन देकर रोजगार के नए अवसर सृजित किए गए। GST सुधारों में उनकी भूमिका रही और हरियाणा के हितों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखा गया।
महामारी और संकट के समय राहत पैकेजों के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध किया कि वे केवल योजनाओं के मंत्री नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासक भी हैं। “सबको अपना मानकर, रहे हमेशा साथ”— यह पंक्ति उनके व्यवहार और कार्यशैली को सटीक रूप से परिभाषित करती है।उनकी पहचान सत्ता के वैभव से नहीं, बल्कि जनसेवा से बनी— “सत्ता का गौरव नहीं, नहीं दिखावा शान। जनसेवा से है बनी, जेपी की पहचान।” विधवाओं, गरीबों, किसानों और जरूरतमंदों के लिए वे सदैव उपलब्ध रहे। स्कूलों, अस्पतालों और सामाजिक संस्थानों के सुधार में उनका योगदान स्थायी प्रभाव छोड़ गया।
वर्ष 2024 के चुनाव में पराजय के बावजूद वे राजनीति से दूर नहीं हुए। भाजपा संगठन में उनका अनुभव आज भी मार्गदर्शक है। 70 वर्ष की उम्र में भी वे ऊर्जावान हैं और ग्रामीण हरियाणा के मुद्दों पर लगातार अपनी बात रखते हैं। जलवायु परिवर्तन, जल संकट और किसानों की चुनौतियों पर उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। डॉ. सत्यवान सौरभ के दोहे उनके जीवन और कार्यों का सार प्रस्तुत करते हैं— “पक्की कर दी फिरणिया, सुधरे सारे ताल। केवल ऐसा कर सके, जयप्रकाश दलाल।” जन्मदिन के अवसर पर लोहारू, भिवानी और समस्त हरियाणा उन्हें नमन करता है।
जयप्रकाश दलाल जी को हार्दिक जन्मदिन शुभकामनाएं।
“सच में अब तो चाहिए, जेपी ही हर बार।”

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

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