कला कीर्ति भवन में नाटक चक्कर पे चक्कर का हुआ सफल मंचन, डीएसपी कुरुक्षेत्र रहे मुख्यअतिथि
———
कुरुक्षेत्र 31 जनवरी। जिंदगी में हंसना बेहद जरुरी है। बिना हास्य के जीवन नीरस हो जाता है। एक ओर जहां हास्य तनाव को दूर करता है, वहीं लोगों के अंदर स्फूर्ति भी पैदा करता है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला कला कीर्ति भवन की भरतमुनि रंगशाला में। मौका था हरियाणा कला परिषद की साप्ताहिक संध्या का। जिसमें नाट्यशाला थियेटर सोसायटी दिल्ली के कलाकारों ने हास्य नाटक चक्कर पे चक्कर का मंचन कर लोगों को गुदगुदाने का कार्य किया। इस मौके पर पूलिस उपअधीक्षक सुनील कुमार व रोहताश जांगड़ा ने मुख्य अतिथि के रुप में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। वहीं विशिष्ट अतिथि पुलिस प्रवक्ता नरेश सागवाल व वरिष्ठ रंगकर्मी शिवकुमार किरमच उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेखा मखीजा ने की।  मंच का संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। लक्की कटारिया के लेखन व निर्देशन में नाटक चक्कर पे चक्कर से पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। हरियाणा कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल गुगलानी ने पुष्पगुच्छ भेंटकर अतिथियों का स्वागत किया। दिनेश यादव के सहनिर्देशन में मंचित नाटक में कलाकारों ने एक घर की कहानी को हल्के-फुल्के तथा हास्यपूर्ण अदांज में दिखाया। रसीला और उनकी पत्नी अपने बेटे की शादी के लिए झगड़ा कर रहे हैं। जिसमें रसीला भारतीय लड़की के साथ अपने बेटे की शादी करना चाहता है और उसकी पत्नी अमेरिकन लड़की से। दोनों पति-पत्नी की इस खींचतान का फायदा घर का नौकर टून्ना उठाता है। जो दोनों को अलग-अलग आईडिया देकर पैसें ऐंठता रहता है। मां-बाप की लड़ाई के बीच में पिसने वाला बेटा अपनी गर्लफ्रेंड को घर की नौकरानी बनाकर घर ले आता है। नौकरानी के घर में आने पर घर का नौकर टून्ना उस पर लट्टू हो जाता है। उधर बेटा नौकर से कहता है कि उसके मां-बाप को इस लवमैरिज के बारे में मनाने के लिए कोई उपाय दे, तो टून्ना उससे भी पैसें ऐंठ लेता है। हंसी के साथ आगे बढ़ते नाटक में जब घर में तनाव बढ़ने लगता है तो घर का बेटा नौकरानी को लेकर भाग जाता है और उससे शादी कर लेता है। उधर उसके मां बाप बेटे के गायब हो जाने पर परेशान हो जाते हैं और उसकी शादी उसकी मर्जी से करवाने के लिए मान जाते हैं। जब दोनों शादी करके घर लौटते हैं तो रसीला और उसकी पत्नी दोनों को अपना लेते हैं। इस तरह सुखांत के साथ नाटक समाप्त हो जाता है। नाटक में अनिल यादव, परमिंदर सिंह, सुप्रिया पहूजा, कृष्ण कुमार गोला, दिनेश यादव, किशन भारद्वाज, प्रतिमा कुमारी और लक्की कटारिया ने अभिनय किया। अंत में मुख्यअतिथि ने स्मृति चिन्ह भेंट कर कलाकारों को सम्मानित किया। हरियाणा कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल गुगलानी ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अतिथियों का आभार जताया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *