पानीपत। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले ब्लीच हाउस संचालकों की अब खैर नहीं। हर एक को दो-दो करोड़ रुपये तक हर्जाना देना पड़ सकता है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) हर्जाना की कैल्कुलेशन कर रहा है। पांच साल का प्रतिदिन 10 हजार रुपये के हिसाब से हर्जाना लगाया जा सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 14 स्थानों पर अवैध रूप से चल रहे 32 ब्लीच हाउस को क्लोजर नोटिस जारी किया था, जोकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते पाए गए थे। जिला योजनाकार विभाग व बिजली निगम को पत्र लिखकर इन पर उनसे संबंधित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इनके बोरवेल सील कर दिए गए थे। बिजली कनेक्शन काट दिए गए थे।

डीसी, सीपीसीबी, एचएसपीसीबी, ग्राउंड वाटर अथाॅरिटी के अधिकारियों को 30 अगस्त को कार्रवाई की रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में पेश की। रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने एचएसपीसीबी को आदेश दिया है कि इन ब्लीच हाउस से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर हर्जाना वसूला जाए।

यहां सील किए थे ब्लीच हाउस

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने सेक्टर 29 पार्ट टू,डाहर, परढ़ाना, गढ़ी छाजू, नारा, कुराड़, सिवाह, चमराड़ा, पलड़ी चौटाला रोड, ड्रेन नंबर एक व दो के किनारे, पट्टीकल्याणा व इसराना में चलज रहे 32 ब्लीड हाउस को सील कर दिया था। इनके पास एनओसी नहीं मिली थी। इन ब्लीच हाउस के कारण पर्यावरण को भी क्षति पहुंच रही थी।

रिकॉर्ड से अलग है हकीकत

एचएसपीसीबी के रिकार्ड में 170 ब्लीच हाउस है, जबकि  हकीकत में 300 से अधिक चल रहे हैं। सबसे अधिक ब्लीच हाउस सनौली, बापौली, डाहर, नौल्था, समालखा, मतलौडा, महराणा क्षेत्र में चल रहे हैं।तीन साल पहले बोर्ड ने ब्लीच हाउस संचालकों को भूमि देने वाले किसानों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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