आधुनिक भारत की संरचना ऊर्जा के बिना नहीं हो सकतीः प्रो. मुकेश कुमार गर्ग
केयू इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग में दीक्षा आरम्भ समारोह
कुरुक्षेत्र, 01 सितम्बर
। इंस्ट्रूमेंटेशन सुप्रीम बांच है। इलेक्ट्रिकल एनर्जी के बिना आज के युग में जीना निरर्थक हो जाएगा क्योकि हर उपकरण इलेक्ट्रिकल एनर्जी पर आधारित है। इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग किसी भी आधुनिक उद्योग और अनुसंधान के लिए एक अनिवार्य घटक है, क्योंकि यह मापन, नियंत्रण और स्वचालन के माध्यम से प्रक्रियाओं की सफलता सुनिश्चित करता है। यह उद्गार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने सोमवार को इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग द्वारा आयोजित  दीक्षा आरम्भ समारोह की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। इससे पहले दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि  राष्ट्रीय शिक्षा नीति से विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना साकार होगी। शिक्षा केवल डिग्री और नौकरी देने का साधन नहीं है बल्कि यह व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास का माध्यम है।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग का नाम इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने की घोषणा भी की। विभाग के छात्रों द्वारा बनाई गई ईवी कार जिसे सोलर में परिवर्तित कर दिया गया उस कार में कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, मुकेश कुमार गर्ग तथ प्रो. अवनीश वर्मा के साथ बैठक यूसिक से नए भवन जेसी बोस तक सवारी ली। इसके साथ ही उन्होंने लिक्विड नाइट्रोजन प्लांट, जीसीएमएस लैब, इलेक्ट्रॉनिक वर्कशाप इत्यादि की कार्यप्रणाली देखी की सेंट्रल फैसिलिटी कैसे चलती है। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विभाग के सेवानिवृत्त सीनियर एसटीए जिन्होंने ईवी कार बनाने में सहायता की तथा दूसरे लिक्विड नाइट्रोजन चलाने वाले कर्मचारी  को सम्मानित किया। इसके उपरांत फौरन स्टूडेंट को सम्मानित किया गया। कुलपति द्वारा विभिन्न विभागों कैमिस्टी, आईआईएचएस, जूलॉजी, फोरेंसिक लैब, इंग्लिंग लैंग्वेज लैब के विद्यार्थियों को इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग में प्रशिक्षण लेने के लिए सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि हरियाणा विद्युत नियामक आयोग, पंचकुला के मेम्बर मुकेश कुमार गर्ग ने कहा कि आधुनिक भारत की संरचना ऊर्जा के बिना नहीं हो सकती। भारतवर्ष जब पूर्णतया विकसित भारत बनेगा तो उसमें उर्जा का महत्वपूर्ण योगदान होगा और इसका आत्मनिर्भर भारत में भारत सरकार की तरफ से उर्जा के क्षेत्र में कई आयाम स्थापित किए गए हैं।
इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग के अध्यक्ष प्रो. अवनीश वर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इलेक्ट्रिकल एनर्जी जैसे की बैटरी उसका वर्णन ऋषि अगस्त्यस्मिता में मिलता है जो कि वैदिक काल में 1500 से लेकर 1200 बीसी में लिखा गया था। उसके बाद इंजीनियरिंग शब्द की सबसे पहले 14वीं शताब्दी में उत्पत्ति हुई और भारत में सबसे पहला इंजीनियरिंग कालेज थामस कालेज आफ सिविल इंजीनियरिंग, रूड़की था जिसको आज आईआईटी रूड़की के नाम से जाना जाता है। उसकी 1847 में स्थापना हुई।  मंच का संचालन प्रो. दिनेश राणा ने किया। डॉ. सुरेन्द्र सिंह ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया गया।
इस अवसर पर प्रो. अवनेश वर्मा, प्रो. प्रदीप कुमार, प्रो. सुनील ढींगरा, प्रो. वी.एम. मूर्ति, प्रो. दिनेश सिंह राणा, प्रो. जय पाल सरोहा, डॉ. गगन दीप सिंह गिल सहित शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद थे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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