रेवाड़ी में निर्माणधीन काली माता मंदिर में हुआ चमत्कार, खुदाई में निकली माता की मूर्ति, मंदिर कमेटी ने प्राण प्रतिष्ठा कर लगाया भंडारा। रेवती जी की नगरी व बलराम जी की ससुराल रेवाड़ी में नाई वाली चौक पर उनके नाम से बनाया जाए प्रवेश द्वार।
एंकर :: रेवाड़ी में आज शनिवार को नई सब्जी मंडी स्थित निर्माणधीन काली माता मंदिर संत धाम में भव्य भंडारे का आयोजन हुआ। भंडारे एवं प्रसाद वितरण कार्यक्रम बड़ी संख्या में भक्तजनों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम की शुरुआत महंत श्री प्रीतम गिरी व पदम शरण शुक्ला ने मां महाकाली को भोग लगाकर की। तत्पश्चात साधु महात्माओं और कन्या पूजन कर भंडारा प्रसाद वितरण शुरू किया गया। मंदिर के गद्दीनशीन महंत बाबा अभय सिंह ने बताया कि गत दिनों मंदिर परिसर में निर्माण कार्य के दौरान खुदाई में पिंडी रूप में माता महाकाली प्रकट हुई। मंदिर के पुजारी मुकेश शास्त्री ने विधि विधान से पिंडी रूप की प्राण प्रतिष्ठा की। जिस उपलक्ष में आज यहां भंडारा आयोजित किया गया। इस मौके पर मंदिर सेवक बंटी, दीपक सैनी, विनोद एडवोकेट, यश, अंश, हर्षित, गोलू, जतिन, कुशाल, मिंटू, हिमांशु, नवीन, राधे, मोनू शर्मा, सुरेश शर्मा, मोहित रामपुरा, योगेश शर्मा रामाशंकर लालचंद सैनी आदि भक्तगण उपस्थित रहे।
मंदिर के महंत बाबा अभय सिंह तथा पुजारी मुकेश शास्त्री ने बताया कि निर्माणधीन काली माता मंदिर की स्थापना दो वर्ष पूर्व हुई थी। जिस स्थान पर मंदिर था वहां पहले धर्मशाला होती थी। जब उन्हें इस बारे में पता चला कि यहां पहले धार्मिक धरोहर हुआ करती थी उसके बाद उन्होंने बिना किसी देरी के इस स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें आभाष हुआ कि यहां काली माता की मंडई रूप में मूर्ति है तो उन्होंने खुदाई करवाई जिसमें चमत्कार हुआ खुदाई करवाने के बाद मूर्ति को निकलवाया और कल हरिद्वार से गंगा स्नान करवाके आज मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। जिस संदर्भ में आज मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने जो मंदिर का नक्शा तैयार कराया था उस नक्शे में स्वत: ही इस स्थान पर माता की मूर्ति नजर आ रही थीं जिसके बाद उन्होंने साधु महात्माओं से पूछा तो उन्होंने यहां मूर्ति होने की बात कही जिसके बाद जमीन की खुदाई करने पर यह मूर्ति निकली है जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है कि हजार साल पहले यहां मंदिर हुआ करता था जहां अघोरी पंथ से एक साधु ने समाधि ली थी। उन्होंने बताया कि यहां एक वट वृक्ष यानी नर बरगद का पेड़ है जिसके पत्ते काफी बड़े हैं। उन्होंने बताया कि यह रेवाड़ी का पहला ऐसा मंदिर है जहां बलराम जी राधा कृष्ण जी और रेवती जी चारों की एक भवन में मूर्ति है। उन्होंने बताया कि रेवाड़ी रेवती की नगरी है रेवती का विवाह बलराम जी के साथ हुआ था इसलिए रेवाड़ी बलराम जी की ससुराल मानी जाती है। उन्होंने मांग की कि रेवती जी और बलराम जी के नाम से प्रशासन यहां एक गेट का निर्माण करवाएं।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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