दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के प्लेनरी सत्रों में शिक्षाविदों ने शिक्षक शिक्षा प्रोग्राम्स पर किया मंथन
कुरुक्षेत्र, 29 अप्रैल।
 नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन, नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने कहा कि जल्द ही एक वर्षीय बीएड कोर्स फिर से शुरू होगा। इस कोर्स में चार वर्षीय स्नातक व स्नातकोत्तर करने वाले छात्र दाखिला ले पाएंगे। इसके साथ-साथ जो छात्र तीन वर्ष की स्नातक कर रहे हैं वे उनके लिए दो वर्षीय बीएड करने प्रावधान रखा गया है। प्रो. पंकज अरोड़ा मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन, नई दिल्ली, हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल, पंचकूला तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘शिक्षक शिक्षा में परिवर्तन विकसित भारत 2047 की दिशा में’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन सुबह के सत्र में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि देशभर में शिक्षक शिक्षा के कोर्स चल रहे हैं और सभी कोर्सों का प्रोग्राम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त जो छात्र चार वर्षीय बीए बीएड (आईटीईपी), दो वर्षीय बीएड करने वाले छात्र व एक वर्षीय बीएड डिग्री करने वाले छात्र एक वर्षीय रेगुलर एमएड में दाखिला ले पाएंगे। इसके साथ ही दो वर्षीय पार्ट टाइम एमएड केवल वहीं छात्र कर पाएंगे जो कि देशभर के अलग-अलग शिक्षा संस्थानों में शिक्षण का कार्य, शिक्षण की नीतियां बनाने व शिक्षण के प्रशासनिक कार्यों में लगे हैं।
इस सम्मेलन में इस सत्र का उद्देश्य देशभर में आरम्भ किए गए नए चार वर्षीय बीए बीएड कोर्स के पाठ्यक्रम को लेकर विस्तार से बातचीत करने व शिक्षाविदों से उसके विषय में जानकारी लेना है ताकि इस प्रोग्राम को व्यवस्थित रूप से चलाया जा सके।
प्रो. तृप्ता त्रिवेदी ने एक वर्षीय बीएड कोर्स के बारे में विस्तार से बताया कि इस कोर्स के पाठ्यक्रम को किस प्रकार से तैयार किया गया है और शिक्षा संस्थानों को किस प्रकार से छात्रों को शिक्षा देनी है। प्रो. सीमा धवन ने दो वर्षीय बीएड के बारे में विस्तार से बताया  और एनसीटीई की सदस्य सचिव अभिलाषा झा मिश्रा ने बीएड व एमएड दोनों कोर्सों के बारे में विस्तार से बताया कि एनसीटीई किस प्रकार से देश को भावी शिक्षक देने के लिए काम कर रहा है।
पहले सत्र के समापन पर देशभर से आए प्रतिभागियों ने बीएड एव एमएड कोर्स को लेकर मंच पर आसीन विषय विशेषज्ञों से प्रश्न पूछे तथा प्रो. तृप्ता त्रिवेदी व प्रो. सीमा धवन ने सभी प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं को शांत किया। अंत में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की प्रो. मंजूला चौधरी, प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. महासिंह पूनिया ने मुख्य वक्ताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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