गांधी मेमोरियल नेशनल कॉलेज, अंबाला कैंट हिंदी विभाग संयुक्त तत्वावधान,  हिंदी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र द्वारा विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में ऑनलाइन विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसमें चीन से जुड़े मुख्य वक्ता प्रोफेसर विवेक मणि त्रिपाठी( क्वान्गतोंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, चीन) ने चीन में हिंदी की स्थिति को व्याख्यित किया। कालेज प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त  ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा की हिंदी का महत्व वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी बहुत अधिक है, खासकर पुराने साहित्य को समझने के लिए। हिंदी में लिखी गई पुरानी पुस्तकें और ग्रंथ हमें स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, जीवनशैली और अन्य विषयों पर बहुत कुछ सिखा सकती हैं।आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के बारे में जानकारी हिंदी में लिखी गई पुस्तकों में मिलती है। इन पुस्तकों में वर्णित ज्ञान हमें स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है। मुख्य वक्ता प्रोफेसर विवेक मणि त्रिपाठी ने चीन के मानचित्र को स्पष्ट करते हुए वहां के विद्यालयों से विश्वविद्यालयों तक के हिंदी प्रयोग को मौखिक दस्तावेज द्वारा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि चीन और हिंदी का अंतरसंबंध अत्यधिक प्राचीन है।चीन में हिंदी पढ़ने वाले  विद्यार्थियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रही हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पुष्पा रानी ने बताया कि हिंदी आज प्रत्येक कंठ का गौरव है। प्रवासियों ने हिंदी के सौरभ को विदेश में अपने लेखन के माध्यम से सुवासित किया है।कार्यक्रम संयोजक डॉ राजेंद्र देशवाल ने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य हिंदी की वैश्विक स्थिति को स्पष्ट करना है। शोधार्थी एवं विद्यार्थी जिसे  अपने शोध प्रबंध में संदर्भ के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. रितु गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि हिंदी विश्व गुरु बन रहे भारत का मुकुट बनेगी।  डॉ अनीश ने बताया कि हिंदी भारत का गौरव एवं  पूरा दर्शन है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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