अर्थशास्त्र भारतीय ज्ञान परम्परा का इतिहास हजारों वर्ष पुराना : प्रो. तपन कुमार शांडिल्य
भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का महत्वपूर्ण योगदान : प्रो. एडीएन वाजपेयी
कुवि में तीन दिवसीय इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन के 107वें वार्षिक सम्मेलन का हुआ शुभारम्भ
कुरुक्षेत्र, 27 दिसम्बर। 
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत की जो परिकल्पना की है उसको साकार स्वरूप देने में भारत के अर्थशास्त्रियों का महत्वपूर्ण योगदान होगा। भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 7 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है, आवश्यकता है इसे और अधिक विकसित करने की। भारत ने डिजीटल पैमेंट, हथियार निर्यात, अंतरिक्ष तकनीकी और उद्यमिता के क्षेत्र पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज भारत विश्व की पांचवी अर्थव्यवस्था है तथा 2030 तक भारत पूरे विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित होगा। यह उद्गार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने बतौर मुख्यातिथि कुवि के अर्थशास्त्र विभाग एवं इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘सतत, विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत’ विषय पर आधारित 107वें वार्षिक सम्मेलन में सम्बोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत आज उद्यमिता के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। आज भारत विश्व का सबसे युवा देश है। यहां के युवा उद्यमिता के माध्यम से पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वावलंबी भारत अभियान के माध्यम से आने वाले दिनों में लाखों युवकों को रोजगार मिलेगा। आज का युवा उद्यमिता के माध्यम से रोजगार लेने वाला नहीं अपितु रोजगार देने वाले की राह पर अग्रसर है।
इससे पूर्व इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं कुलपति श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, के प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा की शुरुआत वैदिक काल से हुई है। ऋग्वेद व अथर्ववेद में इसके साक्षात प्रमाण मिलते हैं। भारतीय सांस्कृतिक परम्पराओं में अर्थशास्त्र की अर्थव्यवस्था का स्वरूप निहित है। वैदिक दर्शन में अर्थव्यवस्था प्रबंधन के विविध स्वरूप देखने को मिलते हैं। कौटिल्य का अर्थशास्त्र एवं चाणक्य नीति भारतीय सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था की धूरी है। इसी स्वरूप को भारतीय शिक्षा नीति 2020 में लागू किया गया है। क्षेत्रीय संस्कृति को महत्व दिया गया है। इस शिक्षा नीति में भारत के आत्मनिर्भर भारत का स्वरूप निहित है। आधुनिक भारत की अर्थव्यवस्था भारतीय ज्ञान परम्परा को समाहित कर निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। भारत में आध्यात्मिक अर्थशास्त्र के माध्यम से ज्ञान परम्परा के अनुसार आने वाली पीढ़ियों को आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना चाहिए तभी सर्वे भवन्तु सुखिन के भाव आत्मसात किया जा सकता है।
इस अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर छत्तीसगढ़ के कुलपति एवं विख्यात अर्थशास्त्री प्रो. एडीएन बाजपेयी ने कहा कि वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था का जो आधुनिक स्वरूप देखने को मिल रहा है उसका श्रेय भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को जाता है। उन्होंने 1991 के बजट में इसकी विधिवत रूप से शुरुआत की थी। डॉ. मनमोहन सिंह इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन के सदस्य भी रहे है। देश के विकास में डॉ. मनमोहन सिंह के विकास के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। आज उनके दिखाए हुए विकासशील भारत के स्वरूप को अपनाकर उनको सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।
इस मौके पर उपाध्यक्ष उत्तर क्षेत्र डॉ. जोथी मुरूगन ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन का इतिहास सैंकड़ों वर्ष पुराना है। देश के विख्यात अर्थशास्त्री इसका हिस्सा रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन शास्त्री भी इस एसोसिएशन से जुड़े रहे हैं। तीन दिन चलने वाले इस वार्षिक सम्मेलन में विविध सत्रों के माध्यम भारत की अर्थव्यवस्था पर आधारित अर्थशास्त्री वैचारिक मंथन करेंगे। इसके साथ ही इस वार्षिक सम्मेलन की एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार कर आत्मनिर्भर भारत का अर्थशास्त्रीय स्वरूप भी प्रस्तुत किया जाएगा।
इस अवसर पर डॉ. बीपी चंद्रमोहन, एकेडमिक कोऑर्डिनेटर, आईईए ने अपने संबोधन में तीन दिन तक चलने वाली इस सम्मेलन में अलग-अलग सत्र में किस-किस विषय पर अर्थशास्त्री अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे और देश की अर्थव्यवस्था पर वैचारिक मंथन प्रस्तुत करेंगे की सारांश रिपोर्ट प्रस्तुत की। इससे पूर्व 107वीं इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन के वार्षिक सम्मेलन का कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा एवं इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. तपन कुमार शांडिल्य ने दीप प्रज्ज्वलन कर विधिवत रूप से सम्मेलन के शैक्षणिक सत्र की शुरुआत की।
इस अवसर पर एसोसिएशन की ओर से कुवि कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा, उत्तर क्षेत्र के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र अवस्थी, दक्षिण क्षेत्र के उपाध्यक्ष डॉ. ए.जोथी मुरुगन, एकेडमिक कोऑडिटनेटर आईईए डॉ. बीपी चन्द्र मोहन, चीफ कंवीनर आईईए अनिल कुमार ठाकुर, महासचिव आईईए प्रो. रविन्द्र ब्राह्मे, सम्मेलन के संयोजक प्रो. अंग्रेज राणा, आयोजन सचिव प्रो. अशोक चौहान को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्यातिथि सहित सभी अतिथियों ने इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन की स्मारिका एवं रिसर्च जर्नल का विमोचन भी किया।
इस मौके पर प्रो. एनआर भानूमूर्ति, आईसीएआर डॉ. ए अमरेन्द्र रेड्डी, पूर्व चीफ सेक्रेटरी ओडिशा श्री बिजय कुमार पटनायक, एनआईईपीए से प्रो. आरती श्रीवास्तव, मुम्बई से प्रो. आर नागार्जन, नई दिल्ली से प्रो. सौदामिनी दास, चेन्नई से प्रो. एनआर भानूमूर्थि, केरला से डॉ. सीए प्रियेष, दिल्ली से डॉ. अश्विनी महाजन, चेन्नई से डॉ. एन सुरेश बाबू, पूर्व कुलपति प्रो. अशोक मित्तल, सेवानिवृत्त आईएएस गोकुल पटनायक व उत्तराखंड से डॉ. यामिनी पांडे, अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. दारा सिंह, प्रो. संजीव बंसल, डॉ. प्रदीप चौहान, डॉ. रणबीर सिंह फौगाट, प्रो. प्रो. वीएन अत्री, डॉ. अर्चना चौधरी, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, डॉ. निधि बगड़िया,  डॉ. प्रिया शर्मा सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद थे।
 
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सम्मेलन में 10 से अधिक अर्थशास्त्रियों की पुस्तकों का हुआ विमोचन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित भारतीय आर्थिक संघ के 107वें वार्षिक सम्मेलन में रितु कांग वालिया, सूरज वालिया, सीमा गुप्ता तथा गीता गोयल द्वारा लिखित पुस्तक वूमैन एम्पावरमेंट इन इंडिया, डॉ. विकास प्रधान व प्रो. अंग्रेज सिंह राणा द्वारा सम्पादित पुस्तक विकसित भारत@2047ः द विजन का विमोचन कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा व इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. तपन कुमार शांडिल्य द्वारा किया तथा इसकी पहली प्रति पुस्तक के लेखक को भेंट की। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड के डॉ. दिनेश कुमार गुप्ता की पुस्तक इम्पावरिंग लाईवस फॉर ए  प्रोसपेरियस टूमारो,  डॉ. अनूप कुमार मिश्रा, सिद्धार्थ सिंह तथा उदयभान सिंह की पुस्तक द अनटोल्ड स्टोरीः द क्वेस्ट फॉर डेवलेपमेंट इन द डेजर्ट ए स्टडी ऑफ एचआरआरएल इम्पेक्ट तथा अयोध्या की डॉ. अल्का श्रीवास्तव व डॉ. विनोद कुमार श्रीवास्तव की पुस्तक स्थानीय नगर निकाय का वित्तीय स्वरूप तथा शिव कुमार लाल द्वारा एडिटिड पुस्तक भारत टू विकसित भारत अपरच्यूनिटी एंड चैलेंजिस का विमोचन किया गया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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