करीब 110 करोड़ रुपये की परियोजना से प्रतिवर्ष 28 से 30 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान।
निगमायुक्त ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को दिए समयबद्ध कार्रवाई और बेहतर इंजीनियरिंग डिजाइन के निर्देश।
करनाल 29 अक्टूबर,        

करनाल शहर को स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अर्बन चैलेंज फंड (यू.सी.एफ.) के तहत इन्द्री एस्केप ड्रेन पर प्रस्तावित 20 मेगावाट क्षमता के सोलर एनर्जी प्लांट की स्थापना को लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। परियोजना को बेहतर इंजीनियरिंग डिजाइन, तकनीकी समन्वय और निर्धारित समय सीमा के अनुरूप धरातल पर उतारने के लिए नगर निगम आयुक्त सलोनी शर्मा ने गुरुवार को निगम कार्यालय में नगर निगम, सिंचाई विभाग तथा वन विभाग के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में परियोजना की तकनीकी रूपरेखा, स्थल की निशानदेही, विभागीय अनापत्ति प्रमाण पत्र (एन.डी.सी.), सोलर पैनलों की स्थापना, सुरक्षा और दीर्घकालीन संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि परियोजना की सफलता के लिए शुरुआती स्तर पर ही सभी तकनीकी और विभागीय पहलुओं का उचित आकलन करना जरूरी है, ताकि निर्माण के दौरान किसी प्रकार की बाधा न आए और प्लांट लंबे समय तक सुचारू रूप से कार्य कर सके।
जीपीएस मशीन से करवाई जाए स्थल की निशानदेही, समयबद्ध पूरा हो कार्य।
निगमायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित परियोजना के लिए सबसे पहले जीपीएस मशीन की सहायता से स्थल की सटीक निशानदेही करवाई जाए। यह कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए, ताकि परियोजना की आगामी प्रक्रियाओं को बिना देरी आगे बढ़ाया जा सके।
उन्होंने कहा कि सोलर पैनलों की स्थापना के लिए तकनीकी डिजाइन तैयार करते समय उनकी ऊंचाई, दिशा और स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाए, जिससे पैनलों पर सूर्य की किरणें पर्याप्त मात्रा में पड़ें और बिजली उत्पादन की क्षमता का अधिकतम उपयोग हो सके। इसके साथ ही स्थल की परिस्थितियों, इंजीनियरिंग आवश्यकताओं और भविष्य में प्लांट के रख-रखाव को ध्यान में रखते हुए डिजाइन तैयार किया जाए।
सिंचाई और वन विभाग जल्द जारी करें एन.डी.सी.।
निगमायुक्त ने सिंचाई विभाग तथा वन विभाग के अधिकारियों से परियोजना से संबंधित आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करवाने की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और अपनी जिम्मेदारियों का समयबद्ध तरीके से निर्वहन सुनिश्चित करें।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना के क्रियान्वयन से पहले सभी तकनीकी, प्रशासनिक और विभागीय औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं। प्लांट की सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और दीर्घकालीन कार्यशीलता को भी डिजाइन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए, ताकि भविष्य में संचालन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
गांव मंगलपुर और बुढ़ाखेड़ा क्षेत्र में 6800 मीटर लंबाई में बनेगा प्लांट।
प्रस्तावित परियोजना के तहत गांव मंगलपुर और बुढ़ाखेड़ा के निकट इन्द्री एस्केप ड्रेन क्षेत्र में लगभग 6800 मीटर लंबे हिस्से पर 20 मेगावाट क्षमता का सोलर एनर्जी प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 110 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसकी अनुमानित परिचालन अवधि 30 वर्ष होगी।
यह परियोजना उपलब्ध भूमि और जल निकाय क्षेत्र का कुशल उपयोग करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इससे कृषि एवं अन्य गतिविधियों को प्रभावित किए बिना उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की संभावनाएं विकसित होंगी।
प्रतिवर्ष 28 से 30 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान।
निगमायुक्त ने बताया कि प्रस्तावित सोलर प्लांट से प्रतिवर्ष लगभग 28 से 30 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन होने का अनुमान है। इससे करीब 22 हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड के वार्षिक उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस परियोजना से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा। पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी तथा दीर्घकाल में बिजली की लागत में बचत और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की संभावना है। यह पहल ग्रीन करनाल की अवधारणा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ सरकार के हरित ऊर्जा लक्ष्यों और पर्यावरण अनुकूल विकास की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
चार चरणों में सोलर ऊर्जा से ग्रिड तक पहुंचेगी बिजली। 
सोलर एनर्जी प्लांट में सूर्य के प्रकाश को बिजली में परिवर्तित कर ग्रिड तक पहुंचाने की प्रक्रिया चार प्रमुख चरणों में पूरी होगी। इसमें सबसे पहले सोलर फोटोवोल्टिक (पी.वी.) मॉड्यूल सूर्य के प्रकाश से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करेंगे। इसके बाद इन्वर्टर की सहायता से बिजली को ग्रिड के अनुरूप परिवर्तित किया जाएगा। तत्पश्चात ट्रांसफार्मर के माध्यम से वोल्टेज को आवश्यक स्तर पर लाया जाएगा और अंत में ग्रिड कनेक्शन के जरिए बिजली को विद्युत नेटवर्क तक पहुंचाया जाएगा।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद। 
बैठक में नगर निगम के तकनीकी सलाहकार महिपाल सिंह, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता संजय राहड़, एसडीओ करनैल सिंह, जिला वन अधिकारी नवल किशोर, ब्लॉक वन अधिकारी मनहर गोपाल, आरएफओ राकेश कुमार तथा नगर निगम के सहायक अभियंता मनजीत सिंह राठी एवं मनीष अग्रवाल और कनिष्ठ अभियंता सोहन सिंह मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *