1 नवंबर को होगा उद्घाटन, ब्रोशर का विमोचन और प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगी राष्ट्रपति
01 नवंबर से 4 नवम्बर तक सजेगा हरियाणवी कला-संस्कृति का महाकुंभ, 33 विधाओं में 3 हजार से अधिक कलाकार दिखाएंगे प्रतिभा
कुरुक्षेत्र, 27 अक्टूबर। हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव-2026 इस बार ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनेगा। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू पहली बार रत्नावली राज्य स्तरीय समारोह का उद्घाटन करेंगी। 01 नवंबर से 4 नवम्बर तक तक आयोजित होने वाले इस चार दिवसीय महोत्सव का उद्घाटन समारोह 1 नवंबर को होगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू रत्नावली महोत्सव के ब्रोशर का विमोचन करने के साथ-साथ हरियाणवी लोक कला एवं संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगी।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव में हरियाणा की लोक परंपराओं, लोक कलाओं, संगीत, नृत्य, नाट्य विधाओं और पारंपरिक जीवनशैली के विविध रंग देखने को मिलेंगे। महोत्सव में 33 सांस्कृतिक विधाओं के माध्यम से 3 हजार से अधिक कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। हरियाणवी लोकगीत, भजन, रागनी, एकल एवं समूह नृत्य, लूर, रसिया, सांग, नाटक, एकांकी, समूह गान, भाषण, प्रश्नोत्तरी, लोक वेशभूषा और फैशन शो सहित अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
महोत्सव के संयोजक छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए.आर. चौधरी ने बताया कि रत्नावली हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में विद्यार्थियों और कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने बताया कि 01 नवम्बर को राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति में होने वाले उद्घाटन समारोह के साथ महोत्सव को विशेष पहचान मिलेगी। इस दिन हरियाणवी पॉप गीत, भजन, पुरुष एकल नृत्य, भाषण, कोरियोग्राफी, लूर नृत्य, युगल रागनी और रागनी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों की सांग प्रतियोगिता तथा लोक चित्रकला कार्यशाला एवं प्रदर्शनी भी शुरू होगी।
02 नवम्बर को महिला एकल नृत्य, हरियाणवी लोकगीत, लोक परिधान, स्किट, क्विज, फैशन शो और गजल सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। शाम को हरियाणवी लोक ऑर्केस्ट्रा की प्रस्तुति होगी। इस दौरान प्राचीन हरियाणवी वस्तुओं की प्रदर्शनी भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगी।
03 नवंबर को हरियाणवी चौपाल, मोनो एक्टिंग, समूह गीत, कविता, रसिया समूह नृत्य, एकांकी और लघु फिल्म सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। संगीत संध्या, चित्रकला प्रतियोगिता और प्रदर्शनी भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी।
महोत्सव के अंतिम दिन 4 नवंबर को हरियाणवी समूह नृत्य, पेशेवर रागनी प्रतियोगिता और डे परफॉर्मर की प्रस्तुति होगी। चार दिवसीय आयोजन के समापन पर पुरस्कार वितरण समारोह में विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा।
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने बताया कि रत्नावली केवल एक सांस्कृतिक महोत्सव नहीं, बल्कि हरियाणा की लोक अस्मिता, सांस्कृतिक विरासत और परंपरागत कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। महोत्सव में बोहिया, इंधी, पीढ़ा, बिंदरवाल, फुलझड़ी और सांझी जैसी पारंपरिक कलात्मक वस्तुओं के निर्माण एवं सजावट से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को हरियाणा की पारंपरिक कला और जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने जानकारी देते हुए बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किए जाने वाले राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव की तिथियां पूर्व में 30 अक्टूबर से 2 नवंबर तक निर्धारित की गई थीं। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित कुरुक्षेत्र आगमन के मद्देनजर रत्नावली महोत्सव का आयोजन 01 नवम्बर से 04 नवम्बर, 2026 तक किया जाएगा।
प्रो. महासिंह पूनिया ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा रत्नावली महोत्सव का उद्घाटन किया जाना कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरवपूर्ण अवसर होगा। यह आयोजन हरियाणवी लोक संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने और देश की सांस्कृतिक विविधता में हरियाणा के योगदान को रेखांकित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
