करनाल। जापान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की प्रेरणादायक झलक उस समय देखने को मिली, जब करनाल की महापौर रेणु बाला गुप्ता की अगुवाई में महिला प्रतिनिधियों ने टोक्यो की विश्वप्रसिद्ध स्काई ट्री इमारत पर गीता संदेश का प्रसार करते हुए भारतीय संस्कृति का गौरवपूर्ण परिचय दिया। 634 मीटर ऊंची इस गगनचुंबी संरचना से गीता के सार्वभौमिक संदेश और भारतीय जीवन मूल्यों की अभिव्यक्ति ने वहां उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इस प्रकार भारत की सांस्कृतिक पहचान को नई वैश्विक ऊंचाइयों तक पहुंचाने में यह कारगर कदम सिद्ध हुआ।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड एवं जीओ गीता के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में भारत के साथ-साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन सहित अनेक देशों से पहुंचे श्रद्धालु और प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसी क्रम में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज के मार्गदर्शन में प्रतिनिधिमंडल ने टोक्यो के सुमिडा क्षेत्र स्थित विश्वप्रसिद्ध स्काई ट्री का अवलोकन किया। वर्ष 2012 में स्थापित यह टावर विश्व की तीसरी सबसे ऊंची संरचना तथा सबसे ऊंचा स्वतंत्र प्रसारण टावर माना जाता है।
स्काई ट्री के अवलोकन डेक से दिखाई देने वाले अद्भुत दृश्य के बीच महापौर रेणु बाला गुप्ता ने महिला प्रतिनिधियों का नेतृत्व करते हुए गीता ज्ञान के प्रचार-प्रसार का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज के मार्गदर्शन में जिस प्रकार विश्वभर में गीता का संदेश और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परम्पराएं पहुंच रही हैं, वह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने सभी से गीता संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
भाजपा के पूर्व कार्यकारी जिलाध्यक्ष बृज गुप्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने का एक महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने कहा कि गीता का कर्मयोग, कर्तव्यबोध और मानवीय मूल्यों का संदेश आज भी पूरी मानवता के लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पूर्व था।
इससे पूर्व प्रतिनिधिमंडल ने टोक्यो के ऐतिहासिक एवं विश्वविख्यात सेनसोजी बौद्ध मंदिर के दर्शन किए। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज के नेतृत्व में मंदिर पहुंचे सैकड़ों भारतीय श्रद्धालुओं ने भारत और जापान की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के अद्भुत सामंजस्य को निकट से अनुभव किया। मंदिर परिसर में भारतीय परम्पराओं से मेल खाते श्री, स्वास्तिक, धूप और दीप जैसी आध्यात्मिक परम्पराओं ने सभी को विशेष आकर्षित किया।
इस अवसर पर अपने प्रेरक उद्बोधन में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने कहा कि भगवान बुद्ध को सनातन परम्परा में भगवान विष्णु के अवतार के रूप में स्वीकार किया गया है। बौद्ध और सनातन परम्पराओं का मूल संदेश मानवता, करुणा और विश्व कल्याण है। उन्होंने कहा कि आज जब विश्व विभिन्न प्रकार के संघर्षों और अस्थिरताओं से जूझ रहा है, तब श्रीमद्भगवद्गीता सम्पूर्ण मानवता को शांति, संतुलन, आत्मानुशासन और कर्तव्य का मार्ग दिखाती है।
स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन का अद्भुत दर्शन है, जो मनुष्य को स्वयं से जोड़ते हुए समाज और विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने आह्वान किया कि बौद्ध समाज और सनातन संस्कृति से जुड़े लोग मिलकर विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए कार्य करें।
वहीं, महोत्सव के दौरान गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. मार्कंडेय आहूजा, हरियाणा परिवार फाउंडेशन स्पेन के उपाध्यक्ष कृष्ण सैनी तथा एसोसिएशन ऑफ हरियाणवी इन ऑस्ट्रेलिया के प्रधान सेवा सिंह रेंढू ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जापान की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में भारतीय संस्कृति की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और मानवीय संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने का कार्य कर रहा है।

गतिविधियों में संस्कृति दर्शन
उल्लेखनीय है कि टोक्यो, ओसाका और क्योटो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत गीता प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, आध्यात्मिक संवाद, गीता संगोष्ठियां, योग गतिविधियां तथा जन-जागरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों में जापान के राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक जगत की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिल रही है, जो गीता के वैश्विक प्रभाव और भारत-जापान मैत्री के मजबूत होते संबंधों का सशक्त प्रतीक है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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