कुरुक्षेत्र, 20 मई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी), कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अभिविन्यास एवं संवेदीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार को दो महत्वपूर्ण शैक्षणिक सत्रों का आयोजन किया गया। इन सत्रों में अनुसंधान नैतिकता, पूर्वाग्रह तथा अनुसंधान एवं विकास जैसे समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
पहला सत्र डॉ. अनिल कुमार द्वारा “जिम्मेदार अनुसंधान: नैतिकता को समझना और पूर्वाग्रह को संबोधित करना” विषय पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने अनुसंधान कार्यों में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि पूर्वाग्रह के विभिन्न रूप अकादमिक गुणवत्ता और शोध की प्रामाणिकता को प्रभावित करते हैं। उन्होंने शोध में पारदर्शिता, अखंडता और जिम्मेदार आचरण अपनाने का आह्वान किया। यह सत्र प्रतिभागियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा और उन्हें अपने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक कार्यों में नैतिक मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित किया। दूसरा सत्र प्रो. अनुराग सिंह द्वारा “अनुसंधान और विकास” विषय पर आयोजित किया गया। उन्होंने उच्च शिक्षा एवं सामाजिक विकास में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रो. सिंह ने अनुसंधान पद्धतियों में उभरते रुझानों, अंतःविषय सहयोग तथा गुणवत्तापूर्ण शोध संस्कृति को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को सार्थक अनुसंधान गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन एमएमटीटीसी की निदेशक प्रो. प्रीति जैन तथा पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अंजू बाला द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *