कुरुक्षेत्र, 29 जनवरी। श्रीमद्भगवद्गीता अद्वितीयम अद्युतम मासिक परिचर्चा श्रृंखला का शुभारंभ  शुक्ल एकादशी के पावन दिवस पर के. डी. बी. एवं विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के संयुक्त प्रवास मनोभाव से शुभ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम मे मंच पर डॉ. ममता सचदेवा, उपेन्द्र सिंघल,  उत्तरक्षेत्र विद्या भारती  के सह संगठन मंत्री बाल किशन एवं मुख्य वक्ता को ऋषि गोयल ने बढाई। ममता सचदेवा ने इस प्रकार के प्रयास की प्रशंसा की एवं मुख्य वक्ता ऋषि गोयल से कहा कि भगवदगीता को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मेंं उपयोगी बताया। गीता से प्राप्त ज्ञान को समाज के भिन्न- क्षेत्रों से जोड़ते हुए यह बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में वर्णित सीखने की दृष्टि, आचरण द्वारा सीखने का महत्व एवं प्रबंधन जैस े विषयों को स्पर्श करते हुये, चलने वाली मासिक परिचर्चा की आधारशीला रखी। इस अवसर पर उपस्थित विद्वत जनों ने परिचर्चा में सहभाग करते हुए अपने मत से सभी को अवगत कराया।
बाल किशन ने वर्तमान में राष्ट्रव्यापी चल रहे पंच परिवर्तन के विषय पर बात रखते हुए स्वदेशी, कुटुम्ब प्रबोधन एवं सामाजिक समरसता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। परिचर्चा में मुख्य रूप से  सौरभ चौधरी, अलकेश मोदगील, संदीप छाबडी, हा. रामचन्द्र, डॉ कुलदीप आर्य, देवराज जैन, डा. चितरंजन कौशल, जयभगवान सिंगला, नारायण सिंह,  डा. सतहंस, डा. रीता, सुधीर कुमार रहे।

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