कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में 10वें राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पर केयू कुटिक व सीआईसी द्वारा ‘इंटर्नशिप के लिए कॉल’ का शुभारम्भ हुआ। जिसके तहत विद्यार्थियों को उद्योग-आधारित व्यावहारिक अनुभव, अनुभवात्मक शिक्षण तथा स्टार्टअप्स के साथ कार्य करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही इस पहल से विश्वविद्यालय के नवाचार एवं उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाया जा सकेगा। इस अवसर पर कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने कहा कि नवाचार एवं उद्यमिता विकसित भारत 2047 का मुख्य आधार है। उन्होंने ‘इंटर्नशिप के लिए कॉल’ के शुरू होने पर कुटिक एवं सामुदायिक इंक्यूबेशन सेंटर को बधाई देते हुए कहा कि नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना वर्तमान समय की मांग है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल न केवल व्यावहारिक कौशल एवं रोजगार क्षमता को बढ़ाती हैं, बल्कि छात्रों में आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान क्षमता तथा उद्यमशील मानसिकता भी विकसित करती हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप संस्कृति से प्रारंभिक स्तर पर परिचय छात्रों को उद्योग की अपेक्षाओं को समझने में मदद करता है, जिससे वे अधिक आत्मविश्वासी एवं भविष्य के लिए तैयार बनते हैं।
लेफ्टिनेंट (डॉ.) अजय जांगड़ा, समन्वयक, कुटिक ने इनक्यूबेशन केंद्र की गतिविधियों की जानकारी देते हुए केन्द्र में उपलब्ध सुविधाओं तथा फिनटेक, एग्रीटेक, मेडटेक, ग्रीन एनर्जी, पर्यावरण आदि विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत स्टार्टअप्स के बारे में बताया। अब तक कुटिक द्वारा 30 स्टार्टअप्स (इनक्यूबेशन एवं प्री-इनक्यूबेशन) को सहयोग प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि ’एनईपी 2020’ के समर्थन में स्टार्टअप्स के माध्यम से इंटर्नशिप कॉल प्रतिभाशाली मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है, जिससे छात्रों को वास्तविक जीवन की समस्याओं पर कार्य करने का अनुभव प्राप्त होगा।
डॉ. विशाल अहलावत, उप-समन्वयक, कुटिक ने कहा कि स्टार्टअप-आधारित इंटर्नशिप्स छात्रों को बहुविषयक चुनौतियों से रूबरू कराकर उनमें उद्यमशील सोच का विकास करती हैं।
डॉ. प्रियंका जांगड़ा, समन्वयक, सीआईसी ने कहा कि छात्रों एवं संकाय सदस्यों को स्टार्टअप एवं नवाचार गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने से विश्वविद्यालय में नवाचार, अनुसंधान एवं व्यावसायीकरण की संस्कृति को मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर प्रो. अश्विनी मित्तल, डॉ. रीता देवी, डॉ. जसविंदर संधू, डॉ. भंवर सिंह, डॉ. विवेक, डॉ. रविंदर चौधरी, डॉ. विकास,रूपेश एवं मनोज शर्मा (इनक्यूबेशन कंसल्टेंट, कुटिक) उपस्थित रहे।
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विश्वविद्यालय संकाय आधारित स्टार्टअप भी हुआ शुरू
कुटिक समन्वयक डॉ. अजय जांगड़ा ने बताया कि कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में पहली बार विश्वविद्यालय संकाय आधारित पहले स्टार्टअप की भी शुरूआत हुई है। यह विश्वविद्यालय में संकाय उद्यमिता एवं शोध आधारित नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने में एक बहुत बड़ा कदम है। इस अवसर पर सभी सदस्यों ने क्षेत्र में एक सशक्त स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण तथा नवाचार-आधारित विकास को समर्थन देने के लिए कुटिक की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
प्राचीन काल के पत्थर के औजार, मिट्टी के बर्तन एवं प्राचीन पुरावशेषों पर केंद्रित होगी कार्यशाला
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में केयू के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग में 19 से 24 जनवरी 2026 के बीच प्राचीन काल के पत्थर के औजार, मिट्टी के बर्तन व प्राचीन पुरावशेषों को लेकर कार्यशाला आयोजित होगी। यह जानकारी देते हुए कार्यशाला के संयोजक व एआईएच के विभागाध्यक्ष प्रो. भगत सिंह ने बताया कि यह 6 दिवसीय कार्यशाला एआईएच के सेमिनार हॉल में आयोजित होगी जिसमें विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि कार्यशाला के दौरान विद्वतजन भारतीय ऐतिहासिक पुरावशेषों की बारीकियों एवं संस्कृति संबंधी जानकारी भी साझा करेंगे। कार्यशाला के सह-संयोजक डॉ. राजपाल ने कहा कि प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए प्राचीन, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पुरावशेषों का व्यावहारिक ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। यह कार्यशाला विद्यार्थियों की अकादमिक समझ को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी।
