ब्रज की 84 कोसी यात्रा की तर्ज पर कुरुक्षेत्र में स्थित तीर्थों की यात्रा शुरू करने के लिए प्रयासरत
कुरुक्षेत्र में 48 कोस तीर्थ सम्मेलन आयोजित
कुरूक्षेत्र 1 दिसंबर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश सरकार कुरुक्षेत्र को दुनिया का सबसे गौरवपूर्ण स्थान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन के बाद वर्ष 2016 से कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री आज कुरुक्षेत्र में आयोजित 48 कोस तीर्थ सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गीता ज्ञान संस्थानम् के अध्यक्ष स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के अलावा धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र के विभिन्न तीर्थों के प्रतिनिधिगण तथा श्रद्धालुगण उपस्थित थे। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा कुरुक्षेत्र के 48 कोस में आने वाले तीर्थों की जानकारी देने वाली पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी को गीता जयंती पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज के दिन 5162 वर्ष पहले कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर भगवान श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन के माध्यम से मानव मात्र को गीता का कर्मयोग का अमर संदेश दिया था। धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र में पिछले 17 दिनों से गीता प्रेमी सज्जन एवं श्रद्धालु 10वें अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आनन्द ले रहे हैं। इसके अलावा भी इन दिनों पूरा हरियाणा गीतामयी है। हर जिले में गीता के स्वर गूंज रहे हैं। विभिन्न तीर्थों पर भी गीता महोत्सव की धूम है। राज्य एवं जिला स्तर पर एक साथ मनाया जाने वाला यह महोत्सव धार्मिक, सांस्कृतिक, कला एवं संस्कृति का एक अनुपम उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान कहा था कि कुरुक्षेत्र को गीता स्थली के रूप में पहचान दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन के बाद वर्ष 2016 से गीता महोत्सव को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गत 25 नवंबर को प्रधानमंत्री भी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होकर हर व्यक्ति को गीता के जोड़ने का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कुरुक्षेत्र के पास ज्योतिसर में जिस वट वृक्ष के नीचे भगवान् श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। उस स्थान के जीर्णोद्धार के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई ने स्पेशल पैकेज दिया था। उन्होंने देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी लुप्तप्राय हो रहे तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार को प्राथमिकता दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखता है वह युवा पीढ़ी को अच्छे नैतिक संस्कार देता है। इसीलिए हम वेदों, पुराणों व गीता की रचनास्थली हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और उसे नई पीढिय़ों तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। पावन सरस्वती एवं दृशद्वती नदियों के बीच स्थित कुरुक्षेत्र की 48 कोस भूमि में 367 तीर्थ स्थल हैं। इनमें से कुछ लगभग लुप्त हो चुके हैं। हम इन तीर्थों का जीर्णोद्धार कर इनके वैभव को पुन: स्थापित करने के लिए कृतसंकल्प हैं। वर्ष 2023 में 48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि के 164 तीर्थों की सूची में सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण के पश्चात 18 नए तीर्थों को जोड़ा गया है। इससे अब इस पवित्र भूमि के 182 तीर्थों का दस्तावेजीकरण हो चुका है। यह कार्य अभी जारी है और निकट भविष्य में इस सूची में ओर भी तीर्थों के जुड़ने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि ब्रज की 84 कोसी यात्रा की तर्ज पर 48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि में स्थित तीर्थों की यात्रा शुरू की जाए। धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र को भगवान श्रीकृष्ण जी की नगरी मथुरा और धार्मिक स्थल हरिद्वार से जोड़ने के लिए इन मार्गों पर ट्रेन चलाई गई है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा स्वदेश दर्शन स्कीम के तहत कुरुक्षेत्र को वर्ष 2015 में श्रीकृष्णा सर्किट में शामिल किया गया है। इस स्कीम के तहत विभिन्न तीर्थों पर विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। इस सर्किट के तहत 48 कोस की परिधि में स्थित 134 स्थानों का पर्यटन स्थलों के रूप में विकास होगा। इसी कड़ी में, ज्योतिसर तीर्थ में महाभारत थीम पर आधारित ज्योतिसर अनुभव केंद्र का लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गत 25 नवंबर को हुआ है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा इस समय कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि में स्थित लगभग 80 तीर्थों पर विकास कार्य चल रहे हैं। हम अन्य तीर्थों के जीर्णोद्धार के लिए भी कृतसंकल्प हैं। इसमें 80 करोड़ 55 लाख रुपये की राशि से 4 तीर्थ स्थलों-ब्रह्मसरोवर, ज्योतिसर तीर्थ, नरकातारी, सन्निहित सरोवर का विकास शामिल है। इसके अलावा, कुरुक्षेत्र शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहे हैं ताकि यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अच्छी यादें लेकर जाएं। गीता की जन्म स्थली ज्योतिसर में लगभग 13 करोड़ 63 लाख रुपये की लागत से लगभग 40 फीट ऊंची विराट स्वरूप प्रतिमा पर स्थापित की गई है।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में जन-जन की आस्था के विभिन्न केन्द्र स्थापित हो रहे हैं। देश के दूरदराज के क्षेत्रों में विद्यमान मंदिरों के दर्शन भी अब कुरुक्षेत्र में किये जा सकते हैं। हमने इन मंदिरों की स्थापना के लिए जमीन अलॉट की है। उत्तर भारत के एकमात्र श्री तिरुपति बालाजी मन्दिर का निर्माण हो चुका है। इसके अतिरिक्त जीयो गीता संस्थानम, अक्षरधाम मन्दिर, इस्कॉन मन्दिर तथा ज्ञान मन्दिर का निर्माण भी किया जा रहा है। निश्चित तौर पर इन सभी संस्थाओं का निर्माण पूरा होने पर कुरुक्षेत्र को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिलेगी इस मौके पर पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती, उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा, केयूके कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा, पुलिस अधीक्षक नीतीश अग्रवाल, केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन संजय बठला, चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर, भाजपा के जिलाध्यक्ष तिजेंद्र सिंह गोल्डी, जिला परिषद की चेयरमैन कंवलजीत कौर, जिप उपाध्यक्ष डीपी चौधरी, केडीबी सदस्य विजय नरुला, डा. एमके मोदगिल, कैप्टन अमरजीत सिंह, अशोक रोशा, डा. ऋषिपाल मथाना, सौरभ चौधरी, सैनी समाज सभा के प्रधान गुरनाम सैनी, हरमेश सिंह सैनी, सुशील राणा, डा. अलकेश मोदगिल, राजेश शांडिल्य, डा. संदीप छाबड़ा, सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
तीर्थ स्थल को गांव का गौरव समझकर विकसित करने का होना चाहिए प्रयास:ज्ञानांनद महाराज
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल व मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 48 कोस के एक-एक तीर्थ का अवलोकन करके विकासकारी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का काम किया। इन तीर्थों को विकसित करने में सरकार के साथ-साथ तीर्थ समितियों को भी आगे आने की जरुरत है। इन समितियों को अपने-अपने गांव के तीर्थ को गौरव समझना चाहिए। इस तीर्थ निगरानी कमेटी को हर पहलू पर मंथन करना चाहिए और तीर्थ के विकास को 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन के साथ-साथ सरकार के समक्ष रखना चाहिए। सभी को मिलकर गांव के गौरव तीर्थ को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।
पर्यटकों की भावनाओं को देखते हुए विकसित किए जा रहे है 48 कोस के तीर्थ:सुभाष सुधा
हरियाणा के पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने कहा कि कुरुक्षेत्र 48 कोस के तीर्थों को विकसित करने के लिए पर्यटकों की भावनाओं को वरियता दी जा रही है। इन तीर्थों को विकसित करने के लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने एक-एक तीर्थ का भ्रमण किया था और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी 48 कोस के तीर्थों का भ्रमण किया। इन तीर्थों को विकसित करने के लिए योजना तैयार की। इस योजना के तहत तीर्थों को विकसित किया जा रहा है और सरकार की तरफ से आर्थिक अनुदान भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके साथ तीर्थ समितियां भी विकास कार्यों में अपना सहयोग दे रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कुरुक्षेत्र गीता स्थली ज्योतिसर में नमन करने उपरांत ही शुभ कार्य करते है। इसी भावना को लेकर मुख्यमंत्री हर तीर्थ को विकसित करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे है।
182 तीर्थों को सरकार की तरफ से किया गया है विकसित:भारत भूषण भारती
मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती ने कहा कि कुरुक्षेत्र 48 कोस में 367 तीर्थ विराजमान है। इनमें से 182 तीर्थों की खोज करके प्रदेश सरकार की तरफ से विकसित किया गया है। इन तीर्थों को गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के मार्गदर्शन में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विकसित करने का अनोखा काम किया है। इन तीर्थों पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दौरा किया और लोगों की समस्याओं को सुना और उनका समाधान भी किया। इस दौरान तीर्थों को विकसित करने की योजना भी तैयार की गई। इन तीर्थों का लगातार विकास हो, सरकार का हमेशा यहीं प्रयास रहेगा।
10 सालों में 48 कोस के तीर्थों का हुआ विकास के माध्यम से कायापलट:उपेंद्र सिंघल
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले 10 सालों में कुरुक्षेत्र 48 कोस के 182 तीर्थों की कायापलट की है। इन तीर्थों को विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने लगातार प्रयास किया। इस 48 कोस में 367 में से 182 तीर्थों की पहचान करके विकसित किया जा रहा है। इन तीर्थों को विकसित करने के लिए जहां आर्थिक सहायता की जरुरत रहती है, वहीं तीर्थ समितियों द्वारा भी तीर्थों को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन तीर्थों पर धार्मिक अनुष्ठïान, वार्षिक उत्सव, गीता जयंती जैसे अन्य कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए ताकि इन तीर्थों की महिमा आमजन तक पहुंच सके। मानद सचिव ने तीर्थों की विकासकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला और भावी योजनाओं को भी सबके समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद के मार्गदर्शन में 48 कोस के तीर्थों का विकास किया गया। इन तीर्थों का विकास करने में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
कुरुक्षेत्र में 48 कोस तीर्थ सम्मेलन आयोजित
कुरूक्षेत्र 1 दिसंबर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश सरकार कुरुक्षेत्र को दुनिया का सबसे गौरवपूर्ण स्थान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन के बाद वर्ष 2016 से कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री आज कुरुक्षेत्र में आयोजित 48 कोस तीर्थ सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गीता ज्ञान संस्थानम् के अध्यक्ष स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के अलावा धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र के विभिन्न तीर्थों के प्रतिनिधिगण तथा श्रद्धालुगण उपस्थित थे। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा कुरुक्षेत्र के 48 कोस में आने वाले तीर्थों की जानकारी देने वाली पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी को गीता जयंती पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज के दिन 5162 वर्ष पहले कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर भगवान श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन के माध्यम से मानव मात्र को गीता का कर्मयोग का अमर संदेश दिया था। धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र में पिछले 17 दिनों से गीता प्रेमी सज्जन एवं श्रद्धालु 10वें अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आनन्द ले रहे हैं। इसके अलावा भी इन दिनों पूरा हरियाणा गीतामयी है। हर जिले में गीता के स्वर गूंज रहे हैं। विभिन्न तीर्थों पर भी गीता महोत्सव की धूम है। राज्य एवं जिला स्तर पर एक साथ मनाया जाने वाला यह महोत्सव धार्मिक, सांस्कृतिक, कला एवं संस्कृति का एक अनुपम उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान कहा था कि कुरुक्षेत्र को गीता स्थली के रूप में पहचान दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन के बाद वर्ष 2016 से गीता महोत्सव को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गत 25 नवंबर को प्रधानमंत्री भी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होकर हर व्यक्ति को गीता के जोड़ने का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कुरुक्षेत्र के पास ज्योतिसर में जिस वट वृक्ष के नीचे भगवान् श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। उस स्थान के जीर्णोद्धार के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई ने स्पेशल पैकेज दिया था। उन्होंने देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी लुप्तप्राय हो रहे तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार को प्राथमिकता दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखता है वह युवा पीढ़ी को अच्छे नैतिक संस्कार देता है। इसीलिए हम वेदों, पुराणों व गीता की रचनास्थली हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और उसे नई पीढिय़ों तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। पावन सरस्वती एवं दृशद्वती नदियों के बीच स्थित कुरुक्षेत्र की 48 कोस भूमि में 367 तीर्थ स्थल हैं। इनमें से कुछ लगभग लुप्त हो चुके हैं। हम इन तीर्थों का जीर्णोद्धार कर इनके वैभव को पुन: स्थापित करने के लिए कृतसंकल्प हैं। वर्ष 2023 में 48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि के 164 तीर्थों की सूची में सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण के पश्चात 18 नए तीर्थों को जोड़ा गया है। इससे अब इस पवित्र भूमि के 182 तीर्थों का दस्तावेजीकरण हो चुका है। यह कार्य अभी जारी है और निकट भविष्य में इस सूची में ओर भी तीर्थों के जुड़ने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि ब्रज की 84 कोसी यात्रा की तर्ज पर 48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि में स्थित तीर्थों की यात्रा शुरू की जाए। धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र को भगवान श्रीकृष्ण जी की नगरी मथुरा और धार्मिक स्थल हरिद्वार से जोड़ने के लिए इन मार्गों पर ट्रेन चलाई गई है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा स्वदेश दर्शन स्कीम के तहत कुरुक्षेत्र को वर्ष 2015 में श्रीकृष्णा सर्किट में शामिल किया गया है। इस स्कीम के तहत विभिन्न तीर्थों पर विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। इस सर्किट के तहत 48 कोस की परिधि में स्थित 134 स्थानों का पर्यटन स्थलों के रूप में विकास होगा। इसी कड़ी में, ज्योतिसर तीर्थ में महाभारत थीम पर आधारित ज्योतिसर अनुभव केंद्र का लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गत 25 नवंबर को हुआ है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा इस समय कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि में स्थित लगभग 80 तीर्थों पर विकास कार्य चल रहे हैं। हम अन्य तीर्थों के जीर्णोद्धार के लिए भी कृतसंकल्प हैं। इसमें 80 करोड़ 55 लाख रुपये की राशि से 4 तीर्थ स्थलों-ब्रह्मसरोवर, ज्योतिसर तीर्थ, नरकातारी, सन्निहित सरोवर का विकास शामिल है। इसके अलावा, कुरुक्षेत्र शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहे हैं ताकि यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अच्छी यादें लेकर जाएं। गीता की जन्म स्थली ज्योतिसर में लगभग 13 करोड़ 63 लाख रुपये की लागत से लगभग 40 फीट ऊंची विराट स्वरूप प्रतिमा पर स्थापित की गई है।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में जन-जन की आस्था के विभिन्न केन्द्र स्थापित हो रहे हैं। देश के दूरदराज के क्षेत्रों में विद्यमान मंदिरों के दर्शन भी अब कुरुक्षेत्र में किये जा सकते हैं। हमने इन मंदिरों की स्थापना के लिए जमीन अलॉट की है। उत्तर भारत के एकमात्र श्री तिरुपति बालाजी मन्दिर का निर्माण हो चुका है। इसके अतिरिक्त जीयो गीता संस्थानम, अक्षरधाम मन्दिर, इस्कॉन मन्दिर तथा ज्ञान मन्दिर का निर्माण भी किया जा रहा है। निश्चित तौर पर इन सभी संस्थाओं का निर्माण पूरा होने पर कुरुक्षेत्र को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिलेगी इस मौके पर पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती, उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा, केयूके कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा, पुलिस अधीक्षक नीतीश अग्रवाल, केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन संजय बठला, चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर, भाजपा के जिलाध्यक्ष तिजेंद्र सिंह गोल्डी, जिला परिषद की चेयरमैन कंवलजीत कौर, जिप उपाध्यक्ष डीपी चौधरी, केडीबी सदस्य विजय नरुला, डा. एमके मोदगिल, कैप्टन अमरजीत सिंह, अशोक रोशा, डा. ऋषिपाल मथाना, सौरभ चौधरी, सैनी समाज सभा के प्रधान गुरनाम सैनी, हरमेश सिंह सैनी, सुशील राणा, डा. अलकेश मोदगिल, राजेश शांडिल्य, डा. संदीप छाबड़ा, सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
तीर्थ स्थल को गांव का गौरव समझकर विकसित करने का होना चाहिए प्रयास:ज्ञानांनद महाराज
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल व मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 48 कोस के एक-एक तीर्थ का अवलोकन करके विकासकारी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का काम किया। इन तीर्थों को विकसित करने में सरकार के साथ-साथ तीर्थ समितियों को भी आगे आने की जरुरत है। इन समितियों को अपने-अपने गांव के तीर्थ को गौरव समझना चाहिए। इस तीर्थ निगरानी कमेटी को हर पहलू पर मंथन करना चाहिए और तीर्थ के विकास को 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन के साथ-साथ सरकार के समक्ष रखना चाहिए। सभी को मिलकर गांव के गौरव तीर्थ को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।
पर्यटकों की भावनाओं को देखते हुए विकसित किए जा रहे है 48 कोस के तीर्थ:सुभाष सुधा
हरियाणा के पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने कहा कि कुरुक्षेत्र 48 कोस के तीर्थों को विकसित करने के लिए पर्यटकों की भावनाओं को वरियता दी जा रही है। इन तीर्थों को विकसित करने के लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने एक-एक तीर्थ का भ्रमण किया था और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी 48 कोस के तीर्थों का भ्रमण किया। इन तीर्थों को विकसित करने के लिए योजना तैयार की। इस योजना के तहत तीर्थों को विकसित किया जा रहा है और सरकार की तरफ से आर्थिक अनुदान भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके साथ तीर्थ समितियां भी विकास कार्यों में अपना सहयोग दे रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कुरुक्षेत्र गीता स्थली ज्योतिसर में नमन करने उपरांत ही शुभ कार्य करते है। इसी भावना को लेकर मुख्यमंत्री हर तीर्थ को विकसित करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे है।
182 तीर्थों को सरकार की तरफ से किया गया है विकसित:भारत भूषण भारती
मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती ने कहा कि कुरुक्षेत्र 48 कोस में 367 तीर्थ विराजमान है। इनमें से 182 तीर्थों की खोज करके प्रदेश सरकार की तरफ से विकसित किया गया है। इन तीर्थों को गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के मार्गदर्शन में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विकसित करने का अनोखा काम किया है। इन तीर्थों पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दौरा किया और लोगों की समस्याओं को सुना और उनका समाधान भी किया। इस दौरान तीर्थों को विकसित करने की योजना भी तैयार की गई। इन तीर्थों का लगातार विकास हो, सरकार का हमेशा यहीं प्रयास रहेगा।
10 सालों में 48 कोस के तीर्थों का हुआ विकास के माध्यम से कायापलट:उपेंद्र सिंघल
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले 10 सालों में कुरुक्षेत्र 48 कोस के 182 तीर्थों की कायापलट की है। इन तीर्थों को विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने लगातार प्रयास किया। इस 48 कोस में 367 में से 182 तीर्थों की पहचान करके विकसित किया जा रहा है। इन तीर्थों को विकसित करने के लिए जहां आर्थिक सहायता की जरुरत रहती है, वहीं तीर्थ समितियों द्वारा भी तीर्थों को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन तीर्थों पर धार्मिक अनुष्ठïान, वार्षिक उत्सव, गीता जयंती जैसे अन्य कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए ताकि इन तीर्थों की महिमा आमजन तक पहुंच सके। मानद सचिव ने तीर्थों की विकासकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला और भावी योजनाओं को भी सबके समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद के मार्गदर्शन में 48 कोस के तीर्थों का विकास किया गया। इन तीर्थों का विकास करने में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
