चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने माना है कि पासपोर्ट आवेदन में वैवाहिक स्थिति या जीवनसाथी के नाम का उल्लेख करने में अनजाने में हुई गलती अपने आप में पासपोर्ट अधिनियम के तहत पासपोर्ट को जब्त करने या रद करने का औचित्य नहीं रखती है।
इसमें स्पष्ट किया गया है कि ऐसी अनजाने में हुई गलतियां या चूक चाहे आवेदक द्वारा की गई हो या उनकी ओर से फार्म भरने वाले किसी अन्य व्यक्ति द्वारा, कानून के तहत शरारत नहीं मानी जाएगी और इसके लिए पासपोर्ट जब्त करने का दंड नहीं दिया जा सकता।

जस्टिस हर्ष बंगर ने कहा कि जहां आवेदक या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति की ओर से पासपोर्ट आवेदन में अपनी सही वैवाहिक स्थिति का खुलासा करने में कोई अनजाने में गलती या चूक हो जाती है या किसी चूक के कारण पासपोर्ट आवेदन में पति/पत्नी का गलत नाम अंकित हो जाता है, तो यह अधिनियम के अंतर्गत शरारत के अंतर्गत नहीं आएगा।

याचिकाकर्ता की शादी पहले सिद्धार्थ नरूला से हुई थी और वर्ष 2011 में उनका तलाक हो गया था। 2015 में जब याचिकाकर्ता ने ट्रैवल एजेंट के माध्यम से पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया तो पति/पत्नी के नाम का कालम गलती से सिद्धार्थ नरूला के रूप में भर दिया गया था।

तदनुसार, याचिकाकर्ता को पति का नाम सिद्धार्थ नरूला बताकर नया पासपोर्ट जारी किया गया। याचिकाकर्ता ने 2023 में नीरज कुमार से पुनर्विवाह कर लिया और वैवाहिक समस्याओं के कारण नीरज कुमार ने पासपोर्ट अधिकारियों को याचिकाकर्ता के विरुद्ध शिकायत प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया कि उसने अपने पति का नाम सिद्धार्थ नरूला बताकर पासपोर्ट प्राप्त किया था।

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