बागवानी फसलों में कटाई उपरांत प्रबंधन और गुणवत्ता नियंत्रण विषयों की दी गई जानकारी

नीलोखेड़ी/करनाल, 22 अगस्त। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत विस्तार शिक्षा संस्थान नीलोखेड़ी में बागवानी फसलों में कटाई उपरांत प्रबंधन और गुणवत्ता नियंत्रण विषय पर चल रहे चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ। समापन समारोह की अध्यक्षता संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक डा. संजय कुमार ने की।
क्षेत्रीय निदेशक डॉ. संजय कुमार ने  अपने संबोधन में कहा कि भारत की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में बागवानी फसलों का योगदान निरंतर बढ़ रहा है। हालांकि, फसल कटाई के बाद उचित प्रबंधन के अभाव में किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है, जिससे उन्हें अपने परिश्रम का पूरा प्रतिफल नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; उत्पादों की गुणवत्ता और उनका बाज़ार अनुरूप होना भी उतना ही आवश्यक है।
डॉ. कुमार ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि विस्तार अधिकारियों को नवीनतम तकनीकों से अवगत कराना तथा इन जानकारियों को किसानों तक पहुंचाना है। उन्होंने कृषि विस्तार अधिकारियों को विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि यदि किसानों को वैज्ञानिक भंडारण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और परिवहन तकनीकों की जानकारी दी जाए, तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। इससे न केवल किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा, बल्कि वे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से भी जुड़ सकेंगे।
डॉ. कुमार ने बताया कि संस्थान के कुलपति प्रो. बी. आर. कांबोज के मार्गदर्शन में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी, महिला एवं बाल विकास आदि विभागों के विस्तार अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। उन्होंने इस कार्यक्रम को वित्तीय सहयोग प्रदान करने हेतु कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के विस्तार निदेशालय का आभार व्यक्त किया। साथ ही, विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल के योगदान के लिए भी धन्यवाद ज्ञापित किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. जसविंदर कौर द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण में हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और झारखंड से आए कृषि विस्तार अधिकारियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने फसल कटाई उपरांत होने वाले नुकसान को कम करने एवं गुणवत्ता बनाए रखने के विभिन्न पहलुओं पर गहन जानकारी प्राप्त की। डॉ. कौर ने यह भी जानकारी दी कि प्रतिभागियों को राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम), सोनीपत का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया, जहाँ उन्हें खाद्य प्रसंस्करण की व्यवहारिक जानकारी दी गई।
समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर डॉ. सत्यकाम मलिक, डॉ. अनिल कुमार रोहिला, डॉ. अजय कुमार सहित संस्थान के सभी कर्मचारी एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। अंत में डॉ. जसविंदर कौर ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया और कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके सहयोग की सराहना की।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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