अंबाला। अंबाला छावनी के बैंक स्क्वायर के निर्माण शुरू होने से पहले ही 19.67 करोड़ रुपये के खेल का पर्दाफाश हुआ है।

जो कंपनी 87.12 करोड़ रुपये में निर्माण करने की दौड़ में थी, उसकी जगह 106.79 करोड़ रुपये की बिड देने वाली फर्म को टेंडर की मंजूरी दे दी गई। यानी कि अभी निर्माण भी नहीं हुआ कि इससे पहले ही राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का फटका लगने जा रहा था।

राज्य सरकार ने जब एंटी करप्शन ब्यूरो को एफआइआर दर्ज करने के लिए मंजूरी दी, उसमें फर्म का नाम भी शामिल था, जबकि एफआइआर में आरोपितों की सूची में सिर्फ अधिकारी ही शामिल हैं। अब एसीबी जांच में पता लगा रही है कि एसडीएम सहित नौ अधिकारी एएस इंटरप्राइजेज पर क्यों मेहरबानी करना चाहते थे।

अधिकारियों ने टेक्निकल बिड को आधार बनाते हुए गोरा लाल बिल्डर्स को रेस से बाहर क्यों कर दिया और एएस इंटरप्राइजेज को क्यों योग्य मान लिया था। कुल चार कंपनियां रेस में थीं, जिनमें से दो को पहले बाहर किया जा चुका था। अब जांच के दौरान खुलासा हो पाएगा कि एएस इंटरप्राइजेज पर अफसरशाही क्यों मेहरबान थी।

एसीबी ने इस पूरे मामले से संबंधित रिकार्ड कब्जे में ले लिया और नामजद अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी। एसीबी ने मामले में भ्रष्टाचार होने का अंदेशा जताते हुए रिटायर्ड एसडीएम सुभाष सिहाग, रिटायर्ड एसई रमेश मदान, ईओ विनोद नेहरा, एक्सईएन पंकज सैनी, एमई हरीश कुमार, एमई मनेश्वर भारद्वाज, जेई हरीश शर्मा और जेई कपिल कंबोज को आरोपित बनाया है।

एफआइआर में एएस इंटरप्राइजेज से लेकर टेंडर की रेस में शामिल सभी कंपनियों को चिह्नित किया गया है।

यह है मामला

बैंक स्कवायर को बनाने के लिए एंटरप्राइजेज, गोरालाल बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, बृज गोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी और नानूराम गोपाल एंड कंपनी टेंडर की रेस में थे। अधिकारियों की समिति ने दस्तावेजों की जांच कर एएस एंटरप्राइजेज बृजगोपाल कंस्ट्रक्शन कपंनी को योग्य माना था जबकि गोरा लाल बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स व मैसर्ज नानूराम गोपाल एंड कंपनी को अयोग्य घोषित कर दिया था।

इनमें एक कंपनी 106 करोड़ 79 लाख तथा दूसरी कंपनी 114 करोड़ 80 लाख रुपये में रेस में थी, जबकि सबसे कम गोपाल बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स 87.12 करोड़ रुपये थे, जो कि एएस एंटरप्राइजेज की दरों से 19.67 करोड़ रुपये कम थी।

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