सत्य को लेकर जो धर्म बनेगा वही सत्यधर्म होगाः प्रो. हितेन्द्र पटेल
कुवि में राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन
कुरुक्षेत्र, 8 अप्रैल। 
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल ने कहा कि समाज के लिए ज्योतिबा फुले का योगदान महत्वपूर्ण था, और उनके विचार आधुनिक भारत को प्रभावित करते रहे। उन्होंने पारंपरिक जाति व्यवस्था को चुनौती दी और सामाजिक समानता और न्याय का आह्वान किया।
कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में महात्मा ज्योतिबा फुले चेयर, इतिहास विभाग द्वारा सत्य धर्म की ओर ज्योतिराव फुले, उनके सुधार आंदोलन और विरासत का मूल्यांकन विषय पर भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर बोल रहे थे।
रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, कलकत्ता से आए पैनलिस्ट प्रो. हितेन्द्र पटेल ने कहा कि महात्मा उन्हें कहा जाता है जिनका मूल्य उनकी मृत्यु के बाद बढ़ जाता है। सत्य को लेकर जो धर्म बनेगा वही सत्यधर्म होगा। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए इंदिरा सूर्यवंशी, उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने कहा कि गुलामगिरी से आजादी मिले तभी वास्तविक आजादी होगी नहीं तो हम वापिस उसी शोषणकारी समाज में पहुंच जाएंगे। डॉ. वीरेन्द्र ढिल्लन, महाराजा अग्रसेन कॉलेज जगाधरी ने दलित विशेषकर महार रेजीमेंट के सैनिकों की वीरता की बात की। प्रो. एसएम वाघ ने कहा कि हमें शिवाजी के राज्याभिषेक में भी जातीय भेदभाव देखने को मिलता है। प्रो. एसके चहल ने संगोष्ठी के बारे में विस्तार से बताया व सभी अतिथियों व शोधार्थियों को बधाई दी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. सुभाष सैनी ने महात्मा फुले किस प्रकार फुले बने इस पर प्रकाश डाला। उन्होंने महात्मा फुले के चार भाषाओं का वर्णन किया जिन्हें 1856 में सावित्री बाई फुले ने छपवाया। उन्होंने कहा कि फुले कहते थे कि यदि डार्विन के सिद्धांत को मान लिया जाए तो सभी धर्मों में मानव उत्पत्ति के सिद्धान्तों का खंडन हो जाएगा। मंच संचालन डॉ. धर्मवीर ने किया।
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पुस्तक परिचर्चा आयोजित

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में पुस्तक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष व महात्मा ज्योतिबा फुले चेयर के इंचार्ज प्रो. एसके चहल की दो पुस्तकों हिंदू रिफार्मः फ्रेमवर्क ज्योतिराव फुले तथा उनकी आत्मकथा जख्म अभी ताजा है पर चर्चा की गई। परिचर्चा सत्र में प्रो. एस.के. चहल ने अपनी आत्मकथा पर चर्चा करते हुए अपने जीवन के कड़वें अनुभवों का वर्णन किया। डॉ. राजेन्द्र बडगुजर ने कहा कि यह आत्मकथा हरियाणा के दलित की पहली आत्मकथा है। प्रो  एसएम वाघ ने प्रो. चहल की आत्मकथा के विषय में कहा कि ये जख्म तब तक ताजा रहेंगे जब तक ये मानसिकता समाज में बनी रहेगी। प्रो. सुभाष सैनी ने कहा कि पुस्तक में दलित पीड़ा का वर्णन किया गया है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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