चैत्र नवरात्र आज से शुरू पहले दिन माता शैलपुत्री की आराधना। रेवाड़ी के बारह हजारी स्थित प्राचीन सिद्ध पीठ श्री दुर्गा मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी। कलश स्थापना के साथ चैत्र नवरात्र प्रारंभ हुए।
एंकर :: आज रविवार को चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो गई है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की आराधना की जा रही है। माता के मंदिरों में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत में विशेषकर हरियाणा, हिमाचल, पंजाब और चंडीगढ़ के प्रसिद्ध देवी स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। रेवाड़ी के बारह हजारी चौक स्थित सिद्ध पीठ प्राचीन श्री दुर्गा मंदिर सहित सभी देवी मंदिरों में पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ नवरात्र का आगाज हो गया है। माता के जयकारों, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना के साथ मंदिरों में वातावरण भक्तिमय हो गया है। रेवाड़ी के प्राचीन श्री दुर्गा मंदिर समिति के प्रधान महेंद्र चक्रवर्ती, धर्मपाल नंदवानी, प्रवक्ता कृष्ण कुमार लखेरा, अजय जुनेजा तथा पुजारी अयोध्या प्रसाद तिवारी व राधेश्याम शर्मा आदि ने बताया कि श्री दुर्गा मंदिर रेवाड़ी का सबसे प्राचीन एवं सिद्ध पीठ मंदिर है। यहां दोनों नवरात्र पर दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं और नारियल चुन्नी तथा मेवा मिश्री आदि का प्रसाद चढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि आज पहले दिन घट स्थापना के साथ नवरात्र पूजा शुरू हो गई है जो लगातार नौ दिनों तक चलेगी। मंदिर में सुबह-शाम महिला मंडल द्वारा भजन आरती की जाएगी। अष्टमी और नवमी पर बाहर से सुंदर सुन्दर झांकियां बुलवाई गई हैं। नवमी पर प्रातःकाल हवन यज्ञ होगा उसके पश्चात कन्या पूजन और प्रसाद वितरण किया जाएगा।
चैत्र नवरात्र के पहले दिन घरों में घट स्थापना के साथ ही मंदिरों में श्रद्धालु उमड़ रहे है। श्रद्धालुओं ने प्रथम दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जा रही है। शहर के बारा हजारी स्थित मां दुर्गा मंदिर, मोहल्ला नई बस्ती स्थित प्राचीन सिद्ध पीठ माता मनसा देवी मंदिर, बड़ा तालाब देवी का मंदिर, मॉडल टाउन स्थित राधा-कृष्ण मंदिर सहित शहर और गांव के देवी मंदिरों में श्रद्धालु मां दुर्गा की महिमा का गुणगान कर रहे है। चैत्र नवरात्र के साथ ही हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है। इसी दिन दुर्गा मां के पहले स्वरूप के लिए व्रत रखा जाता है। नवरात्रों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। वहीं नवरात्र के दूसरे दिन मां के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है। कठोर साधना और शुद्ध आचरण के कारण इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है। इनकी पूजा से खास तौर पर साधना करने वालों, विद्यार्थियों या तपस्वियों को विशेष लाभ होता है।
शहर के माता मंदिर बारा हजारी स्थित मां दुर्गा मंदिर, मोहल्ला नई बस्ती स्थित प्राचीन सिद्ध पीठ माता मनसा देवी मंदिर में निशान यात्रा, बड़ा तालाब देवी का मंदिर, मॉडल टाउन स्थित राधा-कृष्ण मंदिर सहित शहर और गांव के छोटे-बड़े माता मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की महिमा का गुणगान किया।हिंदू सनातन धर्म में नवरात्रों का विशेष महत्व होता है। चैत्र नवरात्रि का पहला दिन माता शैलपुत्री की उपासना के लिए समर्पित होता है। श्रद्धालु विधि-विधान से कलश स्थापना कर माता की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां शैलपुत्री की आराधना से भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। माता शैलपुत्री का वाहन वृषभ है जो शक्ति और साहस का प्रतीक है। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है, जो संतुलन और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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