हरियाणा के हिसार में कड़ाके की सर्दी के बीच सोमवार को दूसरे दिन भी खूब पाला जमा। तापमान माइनस में पहुंच गया है। सोमवार सुबह हिसार शहर का तापमान 0.8 डिग्री रहा, वहीं बालसमंद का रात्रि तापमान माइनस 0.2 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। हिसार जिले में न्यूनतम तापमान सामान्य से 6 डिग्री नीचे है। बर्फीली हवाएं चल रही हैं और धूप से कोई राहत नहीं। फसलों पर बर्फ का जाल बनने से सरसों में नुकसान की संभावना किसानों को सताने लगी है।

ठंड का कई सालों का टूटा रिकार्ड

हिसार के बालसंमद का तापमान माइनस में जाने से यहां ठंड का कई सालों का रिकार्ड टूटा है। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो बीते 12 सालों से 15 जनवरी को माइनस में तापमान कभी नहीं ही पहुंचा है। लेकिन इस वर्ष जनवरी माह में ऐसा हुआ है। बता दें कि 6 जनवरी 2013 को माइनस 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा था, वहीं 9 जनवरी 2013 को माइनस 0.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था।

हिसार में फसलों पर ओस की बूंदें बर्फ की तरह जमी हैं।
हिसार में फसलों पर ओस की बूंदें बर्फ की तरह जमी हैं।

खेतों में बीछी पाले की सफेद चादर

दो दिनों से हिसार जिले में पड़ रही कड़ाके की ठंड से पाला पड़ना शुरू हो गया है। ओस जमना शुरू हो गयी है। रविवार के बाद सोमवार सुबह के समय में फसलों पर बर्फ जमी हुई नजर आई। सरसों के पौंधों पर तो बर्फ का जाल ही बुन रहा है। इससे सरसों की फलियों में दाना बनने पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

पाला पड़ने की प्रक्रिया

एचएयू के मौसम विभाग के अनुसार सर्द मौसम में जब तापमान हिमांक पर या इससे नीचे चला जाता है तब वायु में उपस्थित जल वाष्प द्रव रूप में परिवर्तित न होकर सीधे ही सूक्ष्म हिमकणों में परिवर्तित हो जाते हैं। इसे ही पाला पड़ना या बर्फ जमना कहा जाता है। दोपहर बाद हवा के न चलने तथा रात में आसमान साफ रहने पर पाला पड़ने की संभावना ज्यादा रहती है।

राज्य में पाला आमतौर पर दिसम्बर से फरवरी के महीने में ही पड़ने की संभावना बनी रहती है। पाले के कारण फसलों, सब्जियों व छोटे फलदार पौधों व नर्सरी पर इसका हानिकारक प्रभाव पड़ता है। फसलों व सब्जियों व छोटे फलदार तनों , फूलों, फलों में उपस्थित द्रव बर्फ के रूप में जम जाता है तथा ये पौधों की कोशिकाओं को नष्ट कर देते है तथा पत्तियों को झुलसा देता है।

सरसों पर बना बर्फ का जाल।
सरसों पर बना बर्फ का जाल।

पाले से फसलों से ऐसे करे बचाव

एचएयू के मौसम विभागाध्यक्ष डॉ मदनलाल ने बताया कि पाले का हानिकारक प्रभाव अगेती सरसों, सब्जियों की फसल आलू, मिर्च, टमाटर, बैंगन, नर्सरी तथा छोटे फलदार पौधों पर पड़ सकता है। इससे बचाव के लिए किसान भाई यदि पानी उपलब्ध हो तो विशेषकर उपरलिखित फसलों, सब्जियों व फलदार पौधों में सिंचाई करे ताकि जमीन का तापमान बढ़ सके।

किसान खेत के किनारे पर और 15 से 20 फीट की दूरी के अंतराल पर जिस तरफ से हवा आ रही है, रात्रि के समय कूड़ा कचरा सुखी घास आदि एकत्रित कर धुआं करें। इससे वातावरण का तापमान बढ़ेगा। पाले का हानिकारक प्रभाव नहीं होगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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