हरियाणा के अंबाला में ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट बनवाने के लिए किन्नरों को भटकना पड़ रहा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समक्ष गुहार लगाने के बावजूद ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट जारी नहीं किए जा रहे।

अंबाला सिटी की ट्रांसजेंडर लतिका महाजन का कहना है कि उन्होंने खुद का सर्टिफिकेट जारी कराने के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी मुलाकात की है। वह अपना मेडिकल कराने को तैयार है, लेकिन बावजूद अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं।

लतिका बोली-कोर्ट का करेगी रुख
लतिका ने बताया कि 26 नवंबर, 2019 को ट्रांसजेंडर एक्ट पारित किया गया था। यह एक्ट व्यक्ति को अपने जेंडर की पहचान स्वयं करने की अनुमति देता है। एक्ट में ट्रांसजेंडर की आइडेंटिफिकेशन का प्रावधान है। यही नहीं, ट्रांसजेंडर को उनके अधिकार दिए गए हैं। लतिका ने कहा कि अगर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग उसका सर्टिफिकेट जारी नहीं करता तो वह कोर्ट का रुख करेगीं।

सुप्रीम कोर्ट भी दे चुका मान्यता
लतिका महाजन ने कहा कि वर्ष 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात को मान्यता दी थी कि ट्रांसजेंडर लोगों को अपने जेंडर को पुरुष, स्त्री या थर्ड जेंडर के रूप में खुद पहचानने का अधिकार है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश भी दिया था कि वे ट्रांसजेंडर को कानूनी रूप से मान्यता दें, उनके खिलाफ सामाजिक लांछन और भेदभाव को खत्म करें और उनके लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाएं।

बोर्ड का गठन के लिए हाईकोर्ट में अर्जी
वहीं, ट्रांसजेंडर लतिका ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दायर की है, जिसमें हरियाणा में ट्रांसजेंडर्स वेलफेयर बोर्ड के गठन करने की मांग की है। लतिका ने कहा कि प्रदेश में अभी तक कोई ट्रांसजेंडर्स वेलफेयर बोर्ड नहीं है। ट्रांसजेंडर्स भीख मांगने को मजबूर हैं। इसलिए उनके हितों को देखते हुए बोर्ड का गठन किया जाए।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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