त्योंहार आपसी भाईचारे के साथ-साथ परम्पराओं को जिंदा रखते हैं। मदन मोहन छाबड़ा
लोक कलाकार प्रेम शर्मा की गायकी ने भरा लोगों में जोश, तालियों से गूंजी रंगशाला
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कुरुक्षेत्र 7 अगस्त। तीज पर्व से त्योंहारों की शुरुआत हो जाती है। अलग-अलग समय में अलग-अलग ढंग से मनाए जाने वाले त्योंहार आपसी भाईचारे के साथ-साथ परम्पराओं को जिंदा रखने का कार्य करते हैं। आधुनिकता के कारण भारतीय त्योंहारों की झलक ग्रामीण अंचल में ज्यादा देखने को मिलती है। ऐसे में हरियाणा कला परिषद परम्पराओं को संजोते हुए युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के दर्शन कराने में अहम भूमिका निभा रहा है। ये शब्द 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के अध्यक्ष मदन मोहन छाबड़ा ने कहे। वे कला कीर्ति भवन में आयोजित तीज उत्सव में दर्शकों को सम्बोंधित कर रहे थे। मौका था हरियाणा कला परिषद द्वारा आयोजित तीज उत्सव का, जिसमें हरियाणवी लोक कलाकार प्रेम शर्मा ने हरियाणवी गायकी और नृत्यों से दर्शकों का मन मोहा, वहीं राजेश जांगड़ा की टीम ने पारम्परिक हरियाणवी लोकगीतों के माध्यम से तीज उत्सव में रंग भरा।

हरियाणवी रंग में रंगा कला कीर्ति भवन, तीज उत्सव में बिखरी सांस्कृतिक छटा,
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तीज उत्सव के दौरान मदन मोहन छाबड़ा बतौर मुख्यअतिथि पहुंचे। कार्यक्रम में पंहुचने पर हरियाणा कला परिषद के निदेशक नागेंद्र शर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर तथा महिलाओं द्वारा तिलक लगाकर अतिथि का स्वागत किया गया। भरतमुनि रंगशाला में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत दीप प्रज्जवलित कर की गई। मंच का संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति गणेश वंदना की रही। जिसमें राजेश जांगड़ा और दल ने हरियाणवी बोली में गणेश वंदना की। इसके बाद प्रेम शर्मा ने शिवस्तुति के साथ माहौल को खुशनूमां बनाया। मिठी तो करदे री मां कोथली और बृज मां गोपी बण गया मेरा बाबा भोलेनाथ जैसे लोकगीतों के साथ हरियाणवी पारम्परिक वेशभूषा में राजेश जांगडा दल की महिला कलाकारों ने खूब रंग जमाया। इसके बाद हरियाणवी नृत्यों से कलाकारों ने सभी का मन मोहा। गीता रानी ने हरियाणवी लोकगीत रिमझिम रिमझिम हे मां मेरी बागां मां री, ए री आया सावन का त्यौंहार और कुवै पै लुगाईयां धौरे जैसे गीत के माध्मय से भरपूर वाहवाही लूटी। वहीं तालियों की ध्वनि पर सुनाये गए गीत खेलण गया था ए किरसन मेरा खेलण गया था ए लडगया काला नाग और काले रंग पै मोरनी रुदन करे पर महिला कलाकारों ने भी जमकर ठूमके लगाए। कार्यक्रम के दौरान माही विष्ट ने कविता के माध्यम से तीज के महत्व को बताया। इसके बाद प्रेम शर्मा के दल ने इक नई नवेली नार नजरां ते वार करै सै, जब पहलम झटके आई वा बहू मुकलाई पर जमकर नृत्य किया और दर्शकों में पूरा जोश भरा। कार्यक्रम के दौरान एक ओर मंच पर कलाकार थिरक रहे थे, तो वहीं दर्शकदीर्घा में अपने अपने स्थान पर लोगों ने भी नाचकर खूशी मनाई। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति सावन गीत चौगरदे ते बाग हरया घनघारे घटा सामण की छोरी गावे गीत सुरीले झूल घली कामण की नृत्य की रही। अंत में हरियाणा कला परिषद की ओर अतिथियों तथा कलाकार दलों को सम्मानित किया गया। अपने सम्बोंधन में नागेंद्र शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हरियाणा कला परिषद द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की सफलता का श्रेय केवल दर्शकों को जाता है। उनके अपार स्नेह और सहयोग के कारण ही कला विस्तार में हम काम कर पा रहे हैं।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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