श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में चरक संहिता पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन का हुआ आयोजन

श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत विभाग द्वारा शुक्रवार को चरक संहिता विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता दिल्ली के चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान के आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. संतोश एसआर नायर रहे। इस अवसर पर कुलपति प्रो. करतार सिंह धीमान ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति विज्ञान आधारित है, इसलिए संहिताओं के मूल अर्थ को पढ़ना बहुत जरूरी है। अगर विद्यार्थी संस्कृत भाषा जानता है और चरक संहिता को पढ़कर रोगी के रोग का निदान करता है, तो ही वह सही अर्थों में अच्छा चिकित्सक बन सकता है। उन्होंने कहा कि जहां दूसरी चिकित्सा पद्धतियों में डॉक्टर सीधे पढ़ने के बाद ही रोगी की बीमारी का इलाज करते हैं, वहीं आयुर्वेद के मूल भाव को जाने बिना रोग का निदान असंभव है। मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. एसआर नायर ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि चरक संहिता आयुर्वेद का मूल ग्रन्थ है, जो आयुर्वेद के सिद्धांत का पूर्ण ग्रंथ है। चरक संहिता में व्याधियों के उपचार तो बताए ही गए हैं इसके साथ ही दर्शन और अर्थशास्त्र के विषयों का भी उल्लेख है। उन्होंने कहा कि चरक संहिता हो या आयुर्वेद का कोई भी ग्रंथ एक बार पढ़कर नहीं समझा जा सकता। विद्यार्थियों को एक विषय को दो या तीन बार जरूर पढ़ना चाहिए। दरअसल चरक संहिता आचार्य चरक द्वारा लगभग तीन या चार हजार साल पहले लिखा गया ग्रंथ है। कम शब्दों में ज्यादा बात कहना उस समय के आचार्यों का उद्देश्य रहा होगा। इसके साथ ही लिखने की भी बाध्यता थी। इसलिए संहिताओं के मूल को पढ़ें तभी अच्छे चिकित्सक बन पाएंगे और समाज को अपना सर्वोच्च दे सकते हैं। इस अवसर पर आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना, सहायक प्राध्यापक डॉ. कृष्ण कुमार और सह प्राध्यापिक डॉ. लसिथा मौजूद रही।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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