हरियाणवी फाग और घोड़ी नृत्य में कलाकारों ने मचाया धमाल, दर्शक झूमने पर हुए मजबूर
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कुरुक्षेत्र 17 फरवरी। हरियाणा कला परिषद द्वारा 11 फरवरी से शुरु किए गए बसंत उत्सव की छठी शाम छत्तीसगढ़ के नाम रही। छत्तीसगढ़ दुर्ग से आई लोक कलाकार सम्प्रिया पूजा ने अपनी पाण्डवानी गायन शैली में खूब समां बांधा। इस मौके पर समाजसेवी व प्रेरणा आश्रम के संस्थापक डा. जयभगवान सिंगला मुख्यअतिथि के रुप में उपस्थित रहे। हरियाणा कला परिषद के निदेशक नागेंद्र शर्मा ने मुख्यअतिथि को पुष्पगुच्छ भेंटकर आभार जताया, वहीं कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत दीप प्रज्जवलित कर की गई। हरियाणा और छत्तीसगढ़ की लोक कला पर आधारित कार्यक्रम का संचालन कला परिषद के मीडिया प्रभारी विकास शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति हरियाणा के कामिल और साथियों द्वारा शिवस्तुति से प्रारम्भ की गई। भगवान शिव की गाथा गाते हुए हरियाणा के कलाकारों ने दर्शकों को खूब आनंद दिया। इसके बाद पाण्डवानी गायन के लिए सुप्रसिद्ध पद्मविभूषण तीजन बाई की शिष्या सम्प्रिया पूजा ने छत्तीसगढ़ी अंदाज में पाण्डवानी गायन प्रस्तुत कर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। कथा गायन शैली में पूजा ने महाभारत के भीष्म पर्व और गदा पर्व का वर्णन किया। महाभारत के युद्ध के समय भीष्म पितामह के मन में चल रहे अंर्तद्वंद्व को सम्प्रिया पूजा ने बखूबी प्रदर्शित किया। वहीं दुर्योधन वध को भी पाण्डवानी शैली में सुनाते हुए छत्तीसगढ़ की कलाकार ने महाभारत से रुबरु करवाया। एक ओर जहां सम्प्रिया पूजा का गायन तथा कथा वर्णन लोगों के मन को भा रहा था, वहीं दूसरी और बैंजो, खड़ताल, तबला, मंजीरा, डफली और ढोलक आदि वाद्ययंत्रों के साथ कलाकार पाण्डवानी गायन में साथ देते हुए विधा को मनोरंजक बना रहे थे। पाण्डवानी के अलावा हरियाणा के कलाकारों ने पारम्परिक नृत्य फाग तथा घोड़ी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। होली के पर्व का सुदंर चित्रण करते हुए कामिल और उनके साथी कलाकारों ने फाग नृत्य से सभी को सराबोर कर दिया। वहीं घोड़ी नृत्य में पुरुष तथा महिला कलाकारों ने दर्शकों को रिझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। हरियाणवी कलाकारो में अक्षय, राममेहर, दीपक, तिलकराज, शिखा, संजना, अन्नपूर्णा, टिना, मोहित, विक्की, रणबीर तथा पाण्डवानी गायन में संतोष निषाद, राजकुमार, गजानन सेन, गिरधारी शर्मा, नरोत्तम दास, समावेश व निखादुरराम आदि शामिल रहे। कार्यक्रम के समापन पर मुख्यअतिथि डा. जयभगवान सिंगला ने कलाकारों की प्रतिभा का सम्मान करते हुए कहा कि लोक कलाकार ही अपने प्रदेश की संस्कृति को जिंदा रखते हैं। कला और संस्कृति को बचाने के लिए लोक कलाकार दिन-रात मेहनत करते हैं तथा अपनी आजीविका का साधन बनाकर सांस्कृतिक विरासत और परम्पराओं को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। अंत में कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया तथा हरियाणा कला परिषद के निदेशक नागेद्र शर्मा ने मुख्यअतिथि को स्मृति चिन्ह देकर आभार व्यक्त किया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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