कुरुक्षेत्र, 09 जून 2026 – वेद और आर्य समाज की मान्यताएं केवल किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए हैं। आज के इस दौर में जब युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से विमुख हो रही है, तब आर्यवीर दल और वीरांगना दल युवाओं में राष्ट्रभक्ति, सेवा और सदाचार के संस्कार फूंकने का महान कार्य कर रहे हैं। यह प्रेरणादायी विचार गुजरात के माननीय राज्यपाल आचार्य श्री देवव्रत जी ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र में चल रहे सार्वदेशिक आर्यवीर दल एवं वीरांगना दल के राष्ट्रीय शिविर में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए। इस अवसर पर सार्वदेशिक आर्यवीर दल न्यास के अध्यक्ष स्वामी देवव्रत सरस्वती, प्रधान संचालक नन्दकिशोर शास्त्री, सार्वदेशिक आर्य वीरांगना दल की प्रधान संचालिका श्रीमती व्रतिका आर्या, वैदिक विद्वान् डाॅ. राजेन्द्र विद्यालंकार, दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के महामंत्री विनय आर्य, आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के प्रधान धर्मवीर आर्य, महामंत्री विजयपाल आर्य, वेद प्रचार अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानन्द जी, महाशय जयपाल आर्य, रामनिवास आर्य, संजीव आर्य सहित अनेक महानुभाव उपस्थित रहे।
शिविर में देश के 15 प्रान्तों से आए हजारों आर्यवीरों और वीरांगनाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल महोदय ने आर्य समाज की मान्यताओं, उसकी प्रासंगिकता और युवा शक्ति के दायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
आचार्य देवव्रत जी ने कहा कि आर्य समाज की मान्यताएं ईश्वर के सच्चे स्वरूप, मानवता और विज्ञान पर आधारित हैं। महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने ‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम्’ अर्थात् संपूर्ण विश्व को श्रेष्ठ बनाओ का जो संदेश दिया था, वह आज के अशांत विश्व के लिए एकमात्र समाधान है।
व्यसनमुक्ति और चरित्र निर्माण की आवश्यकता
युवाओं को सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि आज देश को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत युवाओं की जरूरत है। आर्यवीर दल का यह शिविर युवाओं को न केवल लाठी, तलवार और आत्मरक्षा के गुर सिखाता है, बल्कि उन्हें नशे और कुसंस्कारों से दूर रखकर एक संस्कारी नागरिक बनाता है।
वीरांगनाओं का शौर्य ही समाज की ताकत
वीरांगना दल की सराहना करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि माता जीजाबाई और रानी लक्ष्मीबाई के संस्कारों को आत्मसात कर हमारी बेटियां आत्मरक्षा में सक्षम बन रही हैं। एक सशक्त समाज का निर्माण नारी शक्ति के सबलीकरण के बिना असंभव है।
आर्यवीर दल राष्ट्र का सुरक्षा कवच
उन्होंने आर्यवीर दल के अनुशासन और सेवा भावना की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि जब भी देश पर कोई आपदा आती है, आर्यवीर अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर सेवा कार्य करते हैं। यह दल केवल एक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक जीती-जागती पाठशाला है।
अंत में स्वामी देवव्रत सरस्वती जी ने आचार्यश्री सहित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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