डॉ. राजेश वधवा

कुरुक्षेत्र।  ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 गैरजरूरी जल्दबाजी, एकतरफा तानाशाही पूर्ण तरीके से लागू की जा रही है। यह नीति अमीरों के हितों की रक्षा के लिए है, गरीब जनता के लिए इसमें कुछ नहीं है। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नष्ट करने वाली है और काल्पनिक मिथकों को इतिहास बना कर पेश करने वाली निंदनीय कोशिश है। ‘ये विचार एआईफुक्टो के अध्यक्ष प्रो.केशव भट्टाचार्य और महसचिव प्रो अरुण कुमार ने आज यहां ऑल इंडिया फैडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गेनाइजेशनज़ (एआईफुक्टो) की 32 वीं अकादमिक कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र में देश भर के विभिन्न प्रदेशों से पधारे 1000 के लगभग शिक्षक-प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए व्यक्त किए।तीन दिन विभिन्न सत्रों में चलने वाली हरियाणा में पहली बार होने वाले इस ऐतिहासिक महत्व के उच्चतर शिक्षा महा-सम्मेलन के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र से पधारे राष्ट्र के कद्दावर शिक्षक नेता बी.टी.देशमुख उदाहरण भाषण में संवैधानिक और कानूनी दृष्टि से यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ( यू.जी.सी.) रैगुलेटरी ताकत के स्खलन पर विरोध प्रकट किया। उन्होंने कहा कि पब्लिक फंडिड शिक्षा व्यवस्था को समाप्त करने का काम चल रहा है।शिक्षकों को सबके लिए सस्ती, गुणात्मक शिक्षा के लिए आंदोलन के लिए तैयार होना पड़ेगा।विश्व के सभी देशों के शिक्षक संगठनों के फेडरेशन के अध्यक्ष प्रो. ए.के.मोहन्ती ने अपने एकजुटता संदेश में कहा कि उच्चतर शिक्षा में विचार-विमर्श के अभाव में कार्पोरेट वर्चस्व, फासिज्म, प्रतिक्रियावाद बढ़ रहा है। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा कांफ्रेंस के लिए जगह नहीं देने को एक इसी का उदाहरण बताया। मुख्य भाषण (कीनोट एड्रेस) देते हुए विश्व विख्यात अर्थशास्त्री प्रो.अरुण कुमार (पूर्व प्रोफेसर जे.एन.यू.) ने उच्चतर शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा सरकार का मुख्य व मूल दायित्व है।उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मैकाले -2 की खिताब दिया। इस नीति शिक्षण से रिसर्च को अलग करती है, जनता में शिक्षा के प्रति अलगाव बढ़ाने वाली है, शिक्षकों की स्वायत्तता को समाप्त करने वाली है।प्रो.अरुण कुमार ने कहा कि कोविड-19 के दौरान ओपन बुक परीक्षाओं को लागू करने से सर्वनाश से बचा जा सकता था।उन्होंने कहा कि शिक्षकों को आगे बढ़कर, ,कच्चे-पक्के शिक्षकों का भेद मिटाकर परिवर्तन के लिए नेतृत्व करना होगा। उन्होंने कहा कि हमने शिक्षकों ने लीड नहीं ली इसी लिए एनईपी लागू हो रही है। इस अवसर पर बांग्लादेश के शिक्षक नेता प्रो.जहांगीर, कांफ्रेंस कन्वीनर नरेंद्र चाहर ,एच -फुक्टो अध्यक्ष नरेन्द्र सिवाच,एचसीटीए अध्यक्ष दयानन्द मलिक, एचजीसीटीए अध्यक्ष अमित चौधरी, एडिड कॉलेजज की प्रिंसिपल एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक चौधरी,कांफ्रेंस प्रवक्ता रविन्द्र गासो, लोकल संयोजन समिति के प्रमुख डा हीरा लाल शर्मा,डा सुरेश कुमार, डा राजेन्द्र देशवाल, डा.विजय सिंह,डा.सरिता चौधरी, डा सन्तोष, डा सुनीता भार्गव उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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