अंबाला। खर्च बढ़ने से भारतीय रेलवे की आमदनी घटती जा रही है। आय के सबसे बड़े स्रोत माल ढुलाई में भी पिछले सालों की तुलना में गिरावट आ गई। इससे वरिष्ठ अधिकारी चिंतित हैं। रेलवे बोर्ड ने सभी महाप्रबंधकों को पत्र जारी कर कहा है कि अब माल ढुलाई बढ़ाने के लिए अफसरों को चेंबरों से बाहर निकालना होगा।
साथ ही अन्य विकल्प भी तलाशने होंगे, जिससे आय बढ़ सके। नहीं तो रेलवे कमेटी की सिफारिशों के बाद यात्री किराया बढ़ाने की ओर कदम बढ़ाना पड़ सकता है। देशभर के महाप्रबंधक अब अपने मंडलों में आमदनी बढ़ाने पर जोर देंगे, अन्यथा यात्रियों को मार झेलनी पड़ सकती है।

जानिये, पत्र में क्या चिंता जताई गई

दैनिक जागरण के पास उपलब्ध पत्र के अनुसार 15 मई 2026 को एडिशनल मेंबर (बजट) संजीव नारायण माथुर ने सभी जोन के महाप्रबंधकों को पत्र लिखा है। इसमें बताया है कि रेलवे की आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने और खर्चों में लगातार वृद्धि पर रेलवे बोर्ड ने चिंता जताई है।

वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने और खर्चों पर नियंत्रण करने के निर्देश दिए गए हैं। दो साल के भीतर ही ऐसी स्थिति का सामना रेलवे को करना पड़ रहा है। खर्चों में कटौती के निर्देश भी दिए गए हैं। अप्रैल 2026 में रेलवे ट्रैफिक आय में केवल 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

इसके विपरीत आर्डिनरी वर्किंग एक्सपेंसेज (ओडब्ल्यूई) में 11.6 प्रतिशत और पेंशन खर्च में 9.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यही कारण है कि रेलवे बोर्ड चिंता जता रहा है। पत्र में यह भी बताया गया है कि माल ढुलाई में एक प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि माल भाड़े से होने वाली कमाई में पांच प्रतिशत तक की कमी आई। अप्रैल 2024 की तुलना में अप्रैल 2026 के आंकड़े और कमजोर रहे हैं।

बढ़ सकता अतिरिक्त दबाव

रेलवे बोर्ड ने माना है कि सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में दिए गए फैसले के बाद भारतीय रेलवे को उद्योग का दर्जा मिला है। इससे ट्रैक्शन ऊर्जा और अन्य परिचालन खर्चों में 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। रेलवे की आंतरिक संसाधनों से आय भी लक्ष्य से कम रहने की आशंका जताई गई है।

ऐसे में जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वे काफी चिंतनीय है। निर्देश दिए गए हैं कि बजट सीमा के भीतर रहकर खर्च किए जाएं। संशोधित बजट अनुपात (एसएल) का सख्ती से पालन हो और हर खर्च की नियमित निगरानी की जाए।

साथ ही अतिरिक्त आय बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

 

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