हरियाणा पुस्तकालय संघ ने राज्य सरकार द्वारा शुरू की जा रही “अटल पुस्तकालय परियोजना” का स्वागत करते हुए कहा है कि यह पहल प्रदेश में शिक्षा, ज्ञान और पठन संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। किंतु संघ का मानना है कि जब तक इन पुस्तकालयों में योग्य एवं प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति नहीं की जाएगी और पुस्तकालय व्यवस्था को एक स्वतंत्र प्रशासनिक ढाँचे के अंतर्गत नहीं लाया जाएगा, तब तक यह परियोजना अपने उद्देश्य को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं कर सकेगी।

संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि हरियाणा सरकार ने “द हरियाणा पब्लिक लाइब्रेरी एक्ट, 1989” पारित किया था, जिसका उद्देश्य राज्य में जिला, नगर, ब्लॉक तथा ग्राम स्तर तक सार्वजनिक पुस्तकालय सेवाओं का विस्तार करना था। इस अधिनियम में स्पष्ट रूप से “स्टेट लाइब्रेरी डायरेक्टरेट” स्थापित करने का प्रावधान किया गया था, ताकि प्रदेश की सभी सार्वजनिक पुस्तकालय सेवाओं का संचालन, विकास और निगरानी एक स्वतंत्र पुस्तकालय विभाग के माध्यम से हो सके।

हरियाणा पुस्तकालय संघ का कहना है कि जब राज्य सरकार ने यह कानून बनाया हुआ है, तो उसके अनुरूप सार्वजनिक पुस्तकालय विभाग के लिए स्वतंत्र निदेशालय (Directorate) की स्थापना भी आवश्यक थी तथा राज्य की सभी सार्वजनिक पुस्तकालयों को उसके अधीन लाया जाना चाहिए था। किंतु आज तक यह व्यवस्था पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पाई है।

संघ ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अधिनियम लागू होने के दशकों बाद भी प्रदेश में केवल 26 जिला पुस्तकालय तथा 6 उपमंडल स्तर के पुस्तकालय ही स्थापित हो पाए हैं, जबकि कानून में ग्राम स्तर तक पुस्तकालय नेटवर्क विकसित करने की परिकल्पना की गई थी।

संघ ने यह भी कहा कि वर्ष 1972 के बाद से पुस्तकालयाध्यक्षों की नियमित नियुक्तियाँ न होने के कारण अधिकांश पुस्तकालय प्रशिक्षित स्टाफ के अभाव से जूझ रहे हैं। “हरियाणा पब्लिक लाइब्रेरी एक्ट, 1989” में पुस्तकालय कर्मचारियों के लिए अलग कैडर, सेवा नियम तथा योग्य कर्मचारियों की नियुक्ति का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद आज तक पर्याप्त संख्या में पेशेवर पुस्तकालयाध्यक्ष नियुक्त नहीं किए गए हैं।

हरियाणा पुस्तकालय संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि अटल पुस्तकालय परियोजना के साथ-साथ स्वतंत्र पुस्तकालय निदेशालय की स्थापना, योग्य पुस्तकालयाध्यक्षों की नियमित भर्ती तथा ग्राम स्तर तक पुस्तकालय सेवाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जाए। संघ का मानना है कि केवल भवन और पुस्तकों से पुस्तकालय जीवंत नहीं बनते, बल्कि प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्ष ही उन्हें समाज के ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करते हैं।

संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सरकार “हरियाणा पब्लिक लाइब्रेरी एक्ट, 1989” की मूल भावना के अनुरूप कार्य करे, तो हरियाणा में पुस्तकालय आंदोलन को नई दिशा मिलेगी और प्रदेश का प्रत्येक नागरिक आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण पुस्तकालय सेवाओं से लाभान्वित हो सकेगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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