सवाल: आपको हमेशा छोटे महकमे क्यों मिलते हैं, जहां काम कम हो ?

रॉबर्ट वाड्रा लैंड डील मामले का खुलासा कर देश-दुनिया में चर्चा में आए प्रदेश के सीनियर आईएएस अशोक खेमका एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए राज्य सरकार से विजिलेंस हेड बनाने की पेशकश की है। खेमका हरियाणा में कई घोटालों से पर्दा उठा चुके हैं तो एसीआर पर मुख्यमंत्री द्वारा की गई टिप्पणी को हाई कोर्ट तक में चुनौती दे चुके हैं। 1991 के बैच खेमका 32 साल की सर्विस में 55 तबादले झेल चुके हैं। भ्रष्टाचार और भविष्य की प्लानिंग को लेकर दैनिक भास्कर के विशेष संवाददाता मनोज कुमार ने बातचीत की। पढ़िए बातचीत के मुख्य अंश…।

आप ने विजिलेंस हेड बनने के लिए सीएम को चिट्‌ठी लिखी। क्या जवाब आया ?
-नौकरी में सवा 2 साल बचे हैं। अभी मेरे पास प्रतिदिन औसतन सिर्फ 10 मिनट का काम है। एंटी करप्शन ब्यूरो को ऊपर से कार्यवाही शुरू करनी होगी, तभी भ्रष्टाचार खत्म होगा। अन्यथा दिखावा ही रहेगा।

आपके 55 तबादले हो चुके हैं। आप इसकी क्या वजह मानते हैं ?
-ट्रांसफर क्यों होता है, यह तो करने वाले ही बता सकते हैं। जब मैं जुलाई 1994 में सर्विस में आया तो केंद्र और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। जब मंै टोहाना में एसडीएम था। तब हिसार के डीसी ने कहा कि 200 ट्रक की व्यवस्था करो। हर ट्रक में 50-60 आदमी भर कर दिल्ली रैली में भिजवाने का हुक्म हुआ। मैंने मना किया तो अवर सचिव लगा दिया। जिसने भी हुक्म माना, क्या उससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं मिला होगा?

आपको हमेशा छोटे महकमे ही मिलते रहे हैं। क्यों?
-मुझे ऐसे महकमे में लगाया है, जिसमें सप्ताह में सिर्फ एक घंटे का से ज्यादा का काम नहीं है। जबकि, कुछ अफसर काम के बोझ से दबे रहते हैं। शायद मेरी दक्षता, निर्भीकता, निष्ठा ही मेरी कमी रही है। वे चाहते हैं उनके अनुसार ही काम होना चाहिए, चाहे वह जनहित में हो या ना हो।

आपके रिटायरमेंट में सवा दो साल बचे हैं। आगे क्या प्लानिंग है ?
-अभी भविष्यवाणी नहीं करना चाहता। लेकिन जो भी करूंगा, दिल की गहराई से करूंगा।

आपने 5 सीएम के साथ काम किया। किसकी कैसी कार्यप्रणाली रही है ?
-इस विषय पर समीक्षा करना मेरे लिए उचित नहीं। वे सभी चुने हुए जनप्रतिनिधि थे, और मैं एक जनसेवक हूं। मैंने सभी से कुछ ना कुछ अच्छी बातें सीखी हैं।

आपके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि क्या है ?
-झज्जर व कैथल डीसी रहते हुए ग्राम पंचायतों को विकेन्द्रीकरण एवं विनियंत्रण का सच्चा प्रयास, हाउसिंग बोर्ड में उत्तम घरों का निर्माण, पर्यावरण घातक एस्बेस्टस सीमेंट शीट्स एवं पाइप्स पर प्रतिबंध, स्पोर्ट्स ग्रेडेशन पॉलिसी, चकबंदी में पंचायती जमीनों के घोटाले की रोकथाम, कॉलोनी लाइसेंस की कालाबाजारी काे उजागर करना, ट्रांसपोर्ट में ओवरलोडिंग, परमिट राज की रोकथाम इत्यादि।

आप हमेशा ट्वीट करते हैं। क्या सिस्टम से सवाल करते हैं ?
-मैंने कभी सरकारी नीतियों पर टिप्पणी नहीं की है। मैं कभी-कभी अपनी भावनाएं व्यक्त करता हूं।

हर तरफ चर्चा है कि गृह मंत्री विज से आपकी अच्छी दोस्ती है ?
-गृह मंत्री मन से बहुत ही साफ इंसान हैं। मैं उनका सम्मान करता हूं।

आप हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं। भ्रष्टाचार कैसे खत्म हो सकता है।
-जुर्म के लिए सजा की किताब है। लेकिन यह तभी कारगर है, जब प्रभावी कार्रवाई की जाए। सरकारी नीति भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टोलरेंस की है। लेकिन फिर भी देश में भ्रष्टाचार सर्वव्यापी है। भ्रष्टाचार करने वाले के मन में भय होना जरूरी है। एक्शन ऊपर से शुरू होगा, तभी नीचे असर आएगा। नीचे कार्यवाही करने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, दिखावा मात्र होता है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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