अंबाला। सद्दोपुर स्थित एमएम अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। अस्पताल में उपचाराधीन तीसरी कक्षा की छात्रा गांव रायवाली निवासी आकृति की मौत के दो दिन बाद कार्रवाई नहीं होने से खफा स्वजन का वीरवार को परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। स्वजन ने डाक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।

पीड़ित परिवार की ओर से दर्जनों लोग अस्पताल में पहुंचे थे। स्थिति बिगड़ती देख भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। स्वजन का आरोप है कि गलत उपचार के कारण उनकी मासूम बच्ची की जान गई है, जबकि अस्पताल प्रबंधन इन आरोपों को सिरे से नकार रहा है।
मामले में डाक्टर और स्वजन की बहस का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इसमें बच्ची के पिता डाक्टर से कह रहे हैं कि तुमने मौत के बाद हाथ जोड़कर कहा था कि शव ले जाओ कार्रवाई करेंगे। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।

वायरल वीडियो में एक डाक्टर कह रहे हैं कि वह नौकरी पर आ ही नहीं रहे तो हमने निकाल दिया उन्हें। इसपर स्वजन कहते हैं कि उस दिन तो कह रहे थे हम पर सब रिकार्ड है उनका। आधार कार्ड भी है और पैन कार्ड भी, हम कार्रवाई करेंगे।

जवाब में डाक्टर कहते हैं आधार कार्ड हम दे देते हैं कर लो जो करना है। इस पर स्वजन कहते हैं हमने क्या करना है आधार कार्ड, पैन कार्ड का हमें रात वाला डाक्टर भी चाहिए और स्टाफ भी। 15 मिनट का टाइम देते हैं कार्रवाई करो वरना हम देख लेंगे।

सांस की तकलीफ के बाद 40 दिन पहले हुई थी दाखिल

नारायणगढ़ के गांव रायवाली निवासी सतविंद्र सिंह ने बताया कि उनकी नौ वर्षीय बेटी आकृति करीब 40 दिन पहले सांस लेने में तकलीफ के कारण एमएम अस्पताल सद्दोपुर में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने के कारण उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था।

आरोप है कि उपचार के दौरान एक रात स्टाफ ने लापरवाही की पराकाष्ठा पार कर दी। उन्होंने दावा किया कि बच्ची के गले में पाइप डालते समय स्टाफ ने गलत जगह प्रहार कर दिया, जिससे अंदरूनी चोट आई और खून बहना शुरू हो गया। स्वजन के अनुसार, भारी रक्तस्राव के कारण बच्ची की स्थिति बिगड़ती चली गई और पांच मई को उसने दम तोड़ दिया।

स्टाफ को बुलाने की मांग पर अड़े

वीरवार सुबह मृतका के स्वजन और ग्रामीण अस्पताल परिसर में एकत्रित हो गए। स्वजन का कहना था कि बच्ची की मौत के समय भी प्रबंधन के साथ तीखी बहस हुई थी, लेकिन उस वक्त उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत करवा दिया गया था।

वीरवार को स्वजन इस बात पर अड़ गए कि जिस डाक्टर और स्टाफ ने आकृति का इलाज किया था, उन्हें तुरंत उनके सामने पेश किया जाए। करीब पांच घंटे तक अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा। अस्पताल प्रशासन आधिकारिक तौर पर किसी भी प्रकार की चिकित्सीय चूक से इन्कार कर रहा है। प्रबंधन का तर्क है कि बच्ची की स्थिति पहले से ही अत्यंत गंभीर थी और उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए थे।

बच्ची 40 दिन से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही थी। स्टाफ ने पाइप डालते समय जो गलती की, उसी ने उसकी जान ले ली। हमें इंसाफ चाहिए और हम दोषियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

– सतविंद्र सिंह, मृतका के पिता।

हंगामे की सूचना मिलते ही मैं पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचा था। पुलिस ने आक्रोशित स्वजन को समझाने-बुझाने का प्रयास किया और उन्हें शांत रहने की अपील की। इस मामले में यदि कोई लिखित शिकायत आएगी तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

– वरियाम सिंह, चौकी इंचार्ज।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *