पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आगाज
नीलोखेड़ी/करनाल, 9 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की शासन व्यवस्था में अभूतपूर्व पारदर्शिता आई है। आज सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक सही समय पर पहुँच रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीक के माध्यम से सरकार ने व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाया है, जिससे आम नागरिक का विश्वास शासन प्रणाली में और मजबूत हुआ है। यह बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे आज संस्थान में पांच दिवसीय डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 के अंतर्गत एमआईएस के प्रभावी उपयोग प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक कमलदीप सांगवान तथा एनआईआरडी, हैदराबाद से आए के. राजेश्वर ने डॉ. चौहान का स्वागत करते हुए उनके आगमन पर आभार व्यक्त किया।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि यह पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 के अंतर्गत क्रियान्वित परियोजनाओं में एमआईएस सूचना के प्रभावी उपयोग को समझने और उसे व्यवहार में लागू करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। उन्होंने बताया कि एमआईएस प्रणाली से योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और पारदर्शी क्रियान्वयन संभव होता है, जिससे विकास कार्यों की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार आता है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
डॉ. चौहान ने कहा कि वर्तमान सरकार में नवीनतम तकनीक के उपयोग से एक क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों के उस कथन का उल्लेख किया कि च्च्दिल्ली से भेजे गए एक रुपये में से केवल 15 पैसे ही लाभार्थी तक पहुँच पाते थे। आज प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री द्वारा एक बटन दबाते ही राशि सीधे किसानों के खातों में पहुँच जाती है। यह परिवर्तन तकनीक, पारदर्शिता और सुशासन का सशक्त उदाहरण है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उसे जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना है। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और तकनीकी कौशल का उपयोग अपने-अपने क्षेत्रों में योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए करें। डॉ. चौहान ने कहा कि जब अधिकारी और कर्मचारी तकनीक-सक्षम होते हैं, तभी योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है और ग्रामीण विकास की परिकल्पना साकार होती है।
इस अवसर पर एनआईआरडीपीआर से गुरबिंदर सिंह, तकनीकी विशेषज्ञ महावीर सांगवान, विकास, देव, सत्यवीर सिंह (सदस्य, डब्ल्यूडीटी) तथा सोनू कुमार (डब्ल्यूडीटी) ओर अन्य उपस्थित रहे।
