कुवि के डॉ. बीआर अम्बेडकर अध्ययन केन्द्र द्वारा शोधार्थियों के लिए 10 दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम कार्यशाला का हुआ शुभारम्भ
कुरुक्षेत्र, 25 फरवरी।
 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने कहा है कि शोध पद्धति पाठ्यक्रम शोध करने व प्रकाशित करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शोध पद्धति पाठ्यक्रम द्वारा विभिन्न शोध पद्धतियों और अनुप्रयोगों की आधारभूत जानकारी भी मिलती है जिससे शोध के सैद्धांतिक और व्यावहारिक ढांचे का भी प्रशिक्षण मिलता है। वे मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में डॉ. भीमराव अम्बेडकर अध्ययन केन्द्र द्वारा सामाजिक विज्ञान और इसके संबद्ध विषयों में पीएचडी/पीडीएफ कार्यक्रम करने वाले शोधार्थियों के लिए आयोजित दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम कार्यशाला के शुभारम्भ अवसर पर बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इसके साथ ही उन्होंने शोध में संदर्भ एवं ग्रंथ सूची का भी उल्लेख करने के बारे में जानकारी दी। इससे पहले कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा, मुख्य वक्ता प्रो. एमएम शर्मा तथा कोर्स निदेशक प्रो. महाबीर नरवाल तथा केन्द्र के निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का शुभारम्भ किया।
कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं से शोधार्थी विभिन्न शोध पद्धतियों को समझने में सक्षम होंगे तथा इससे उनके शोध पत्र, शोध कार्यों तथा रिपोर्ट को पूरा करने में मदद भी मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने पीएचडी शोधार्थियों से संवाद किया तथा उन्हें शोध पत्र, लेख, थिसिस लिखने तथा शोध प्रबन्ध की संरचना संबंधी आवश्यक जानकारी भी साझा की।
केन्द्र के निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए केन्द्र द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कोर्सों एवं शोध गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दस दिवसीय शोध विधि पाठ्यक्रम आईसीएसएसआर के द्वारा प्रायोजित है। उन्होंने कहा कि दस दिनों में आयोजित होने वाले विभिन्न सत्रों को उन शिक्षाविदों द्वारा संचालित किया जाएगा, जिनके पास शोध और पत्रिकाओं में प्रकाशन का समृद्ध अनुभव है और जो आईआईटी/आईआईएम/टीआईएसएस/एनआईटी/केंद्रीय विश्वविद्यालयों, राज्य विश्वविद्यालयों आदि जैसे शीर्ष संस्थानों में काम कर रहे हैं।
मुख्य वक्ता अलीगढ़ विश्वविद्यालय के प्रो. एमएम शर्मा ने शोध कार्यों की महत्ता तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शोध कार्यों में प्रयोग करने के बारे में बताया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य करने की विधि तथा जर्नल्स की अहमियत के बारे में जानकारी दी।
कोर्स के निदेशक प्रो. महाबीर नरवाल ने दस दिवसीय शोध कार्यशाला की विस्तृत जानकारी देते हुए शोध की विशेषताओं के बारे में बताया। अंत में केन्द्र के निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच का संचालन डॉ. संगीता ने किया। इस अवसर पर प्रो. महाबीर नरवाल, डॉ. प्रीतम सिंह, डॉ. संगीता धीर, एनएसयूटी से डॉ. केके सिंह तथा छात्रा उपासना सहित शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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