धार्मिक दीवान में श्री दरबार साहिब के हजूरी रागी ने किया कीर्तन
कुरुक्षेत्र, 6 जनवरी
साहिब-ए-कमाल श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज का प्रकाश उत्सव धर्मनगरी के गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी में श्रद्धाभाव से मनाया गया। गुरुद्वारा साहिब में धार्मिक दीवान सजाया गया, जिसमें भारी तदाद में संगत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष शीश नवाया और गुरु चरणों में अरदास की। इस दौरान हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी की कार्यकारिणी समिति मैंबर बीबी रविंदर कौर अजराना, एडिशनल सैकेटरी सतपाल सिंह, उप सचिव रूपिंदर सिंह, अमरिंदर सिंह, मैनेजर हरमीत सिंह सहित जिला भर से भारी तदाद में पहुंची संगत ने माथा टेका। इससे पहले गुरुद्वारा साहिब में रखे गए श्री अखंड पाठ साहिब के भोग पाए गए, जिसके बाद दीवान सजाया गया। धार्मिक दीवान में श्री दरबार साहिब श्री अमृतसर से हजूरी रागी भाई सतिंदर पाल सिंह ने शबद कीर्तन किया। इसके अलावा धर्म प्रचार के प्रचारक ज्ञानी सिमरनजीत सिंह ने गुरबाणी कथा करते हुए संगत से दशमेश पिता जी के जन्म एवं जीवन इतिहास को सांझा किया। पिरथी सिंह पांधी स्वर्ण पदक विजेता ढाडी जत्थे ने भी अपनी ढाडी वारों से गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के जीवन से जुड़ी घटनाओं पर चर्चा की।
कथा विचार करते हुए ज्ञानी हरसिमरनजीत सिंह ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज अलौकिक अस्तित्व के स्वामी रहे। उन्होंने बेमिसाल खालसा पंथ की सृजना की और खालसा पंथ को अमृतपान का ऐसा हथियार दिया, जिसके बलबूते पर आज सिख कौम की देश-दुनिया में अलग पहचान है। यही नहीं, उन्होंने विश्व भर के समक्ष त्याग, बहादुरी, निर्भयता व निडरता का ऐसी मिसाल पेश की, जो उनके अलावा आज तक कोई पेश कर सका और न ही रहती दुनिया तक कोई पेश कर सकेगा। गुरु साहिब का समूचा जीवन शिक्षापद्र रहा। केवल ९ साल की आयु में ही पिता की कुर्बानी देना और फिर छोटे-छोटे अपने साहिबजादों का बलिदान देना कोई आसान नहीं था। गुरु साहिब ने अपना सरबंस धर्म, कौम के लिए न्यौछावर कर दिया, लेकिन अपना धर्म नहीं त्यागा। इसलिए हमें भी दशमेश पिता की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करते हुए आगे बढऩा चाहिए।

गुरुद्वारा श्री मस्तगढ़ साहिब शाहाबाद मारकंडा में भी हुआ गुरमत समागम
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धन-धन श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के प्रकाश पर्व पर शाहाबाद मारकंडा के ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री मस्तगढ़ साहिब में भी कीर्तन समागम करवाया गया। समागम में शहर व आसपास की संगत और हरियाणा कमेटी के मैंबर बेअंत सिंह नलवी ने शीश नवाया। उन्होंने संगत को साहिब-ए-कमाल श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए गुरु साहिब के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। समागम में गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब के हजूरी रागी भाई लखविंदर सिंह व मनराज सिंह ने शबद कीर्तन किया, जबकि स्वर्ण पदक विजेता भाई पिरथी सिंह पांधी और भाई यशकरण सिंह श्री आंनदपुर साहिब वाले के ढाडी जत्थे ने अपनी ढाडी वारों से संगत को गुरु इतिहास से जोड़ा। इसके साथ ही गुरुद्वारा साहिब के हैड ग्रंथी भाई गुरप्रीत सिंह ने गुरबाणी कथा करते हुए गुरु साहिब के जीवन प्रसंग संगत से सांझा किसा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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