संस्कृति, संस्कार, अध्यात्म, गीत-संगीत, मनोरंजन, मेला, सामान मिल रहे एक जगह, कहीं बीन तो कहीं नगाड़ों पर थिरक रहे युवक-युवतियां, साज-सज्जा के साथ घरेलू सामान और वस्त्रों की जमकर की जा रही खरीदारी, भारी संख्या में पहुंच रहे पर्यटक ले रहे महोत्सव का पूर्ण आनंद
कुरुक्षेत्र 6 दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव जनमानस के लिए एक अनूठे संगम के रूप में परिवर्तित हो गया है, जिसने हर आयु वर्ग के लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है। महोत्सव में संस्कृति और संस्कार है तो यहां अध्यात्म भी है। यहां गीत-संगीत है तो लोगों के लिए घरेलू व साज-सज्जा तथा वस्त्रों की भी भरमार है। मनोरंजन के लिए मेला भी लगा है तो धर्मलाभ के लिए रोजाना महाआरती का आयोजन किया जा रहा है।
धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के आयोजन के लिए विश्व स्तर पर अलग पहचान मिल रही है। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले पर्यटकों तथा कलाकारों से सुसज्जित महोत्सव एक लघु भारत की छठा बिखेर रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए कलाकार अपने-अपने राज्य की संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। वहीं शिल्पकार सरस व शिल्प मेले में अपने प्रदेशों की सभ्यता व वेशभूषा आदि को पर्यटकों के लिए लेकर पहुंचें। स्थानीय लोगों के बीच यह संगम उत्सुकता का विषय बना हुआ है। कुरुक्षेत्र के बाबैन निवासी सुधा रानी कहती हैं कि वैसे तो उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में जाने का अवसर पता नहीं कब मिलेगा, लेकिन गीता महोत्सव में उन्हें देश की अद्भुत संस्कृति के दर्शन हो रहे हैं।
संस्कृति व संस्कार की जड़ों को मजबूती देने में गीता महोत्सव मील का पत्थर साबित होगा। मेले में लोग परिवार सहित आ रहे हैं, जिससे बच्चों को भी अपने देश की संस्कृति से रू-ब-रू होने का स्वर्णिम अवसर मिल रहा है। ब्रह्मसरोवर में प्रतिदिन सायंकाल महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। संस्कृत के शोक च्चारण तथा गीता पर आयोजित किए जाने वाले आयोजन हमें हमारी समृद्धशाली संस्कृति का बोध कराते है। गीता महोत्सव में विभिन्न माध्यमों से लोगों को पवित्र ग्रंथ गीता का संदेश दिया जा रहा है। यूं तो आयोजन स्थल में प्रवेश मात्र से ही गीता के संदेशों से किसी न किसी रूप में परिचित होने का अवसर मिल रहा है। साथ ही इस प्रकार के आयोजन व विचार गोष्ठियां विषय को विस्तार से समझाने में मदद करते है। महोत्सव में भारी संख्या में पर्यटक व श्रद्धालुगण पहुंच रहे है, जो हर तरह से महोत्सव आनंद ले रहे हैं। हरियाणा की संस्कृति के साथ अन्य प्रदेशों की संस्कृति लोगों के लिए दर्शनीय है। जनसंपर्क विभाग की हाईटेक राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में विभिन्न विभागों की स्टॉलों पर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।
महोत्सव स्थल पर जगह-जगह बीन तथा नगाड़े बज रहे हैं, जहां से गुजरने वाले युवक-युवतियां भी कलाकारों के साथ थिरकने को विवश हो उठते है। इससे सरस व शिल्प मेले में स्टॉल लगाने वाले शिल्पकारों का भी भरपूर मनोरंजन हो रहा है। गांव हरिपुर बड़ाम से आए टोनी और रूपा का कहना है कि महोत्सव में समय कब बीत जाता है पता ही नहीं चलता। ब्रह्मसरोवर से हटकर भी गीता महोत्सव की छठा बिखेरी जा रही है। संध्या को संगीतमय बनाने के लिए प्रतिदिन प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है। अंबाला से आए हैप्पी, यमुनानगर के सतबीर तथा करनाल के जय सिंह का कहना था कि महोत्सव अपने आप में एक अनूठा व बेहतरीन आयोजन है। यहां लोगों को नायाब वस्तुओं की खरीदारी के लिए भी बेहतरीन मंच मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नियमित रूप से किए जाते रहने चाहिए।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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