कुवि में 6 सितम्बर को आयोजित होगा गोयल पुरस्कार समारोह
कुरुक्षेत्र, 31 अगस्त। 
 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति व गोयल पुरस्कार आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा की अध्यक्षता में 6 सितम्बर को आयोजित होने वाले गोयल पुरस्कार समारोह में यूजीसी चेयरमैन प्रो. एम. जगदेश कुमार देश के प्रतिष्ठित युवा वैज्ञानिक भौतिकी संस्थान, भुवनेश्वर के प्रोफेसर संजीब कुमार अग्रवाला को न्यूट्रिनो भौतिकी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट शोध के लिए प्रतिष्ठित राजीब गोयल पुरस्कार से सम्मानित करेंगे।
गौरतलब है कि 6 सितम्बर को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले गोयल पुरस्कार समारोह में देश के 8 प्रतिष्ठित ख्याति प्राप्त भारतीय वैज्ञानिकों को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए गोयल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
गोयल पुरस्कार आयोजन समिति के सह-अध्यक्ष प्रोफेसर एस.पी. सिंह ने बताया कि डॉ. अग्रवाला ने न्यूट्रिनो भौतिकी के दिलचस्प पहलुओं पर अभिनव अध्ययन किए हैं, जैसे कि पृथ्वी के अंदरूनी हिस्से की जांच करना और डार्क-मैटर का पता लगाने के तरीके प्रस्तावित करना।

कुवि के गोयल पुरस्कार आयोजन समिति के संयोजक प्रोफेसर संजीव अरोड़ा ने बताया कि प्रो. संजीब कुमार अग्रवाला ने 2001 में बीएससी ऑनर्स (भौतिकी) और उसके बाद 2003 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.एससी. (भौतिकी) की डिग्री हासिल की। उन्होंने प्रोफेसर अमिताव रायचौधरी की देखरेख में उसी विश्वविद्यालय से 2009 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने वर्जीनिया टेक, यूएसए और आईएफआईसी, वेलेंसिया विश्वविद्यालय, स्पेन में अपनी पोस्टडॉक्टरल पढ़ाई की। भारत लौटने पर वे भौतिकी संस्थान (आईओपी), भुवनेश्वर में शामिल हो गए जहां वे तब से सेवा कर रहे हैं। उनके शोध का क्षेत्र उच्च ऊर्जा कण भौतिकी है वे न्यूट्रिनो भौतिकी के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित और जाने-माने विशेषज्ञ हैं। उन्होंने न्यूट्रिनो दोलन, न्यूट्रिनो द्रव्यमान क्रम, लेप्टोनिक सीपी उल्लंघन, पृथ्वी की न्यूट्रिनो टोमोग्राफी, खगोल भौतिकीय और लंबी-आधार रेखा वाले न्यूट्रिनो, न्यूट्रिनो प्रयोगों में मानक मॉडल परिदृश्यों से परे, न्यूट्रिनो का पता लगाने की तकनीक, डार्क मैटर का अप्रत्यक्ष पता लगाने जैसे विषयों पर उनके अमूल्य शोध ने न केवल इन नवीन क्षेत्रों में हमारे ज्ञान को उन्नत किया है, बल्कि व्यापक वैज्ञानिक समुदाय के लिए जांच के नए रास्ते भी प्रेरित किए हैं।

लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि प्रो. अग्रवाला अमेरिका में विश्व स्तरीय आइसक्यूब न्यूट्रिनो परियोजना और भारत स्थित न्यूट्रिनो वेधशाला (आईएनओ), हमारे देश की एक मेगा-विज्ञान परियोजना के सक्रिय सदस्य हैं। वह 2022 में यूएसए के विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय में फुलब्राइट-नेहरू फेलो थे, उन्होंने डीएसटी स्वर्णजयंती फेलोशिप प्राप्त की, भौतिकी में प्रतिष्ठित बी.एम. बिड़ला विज्ञान पुरस्कार और एन.एस. सत्यमूर्ति मेमोरियल पुरस्कार जीता। उन्हें भारत में तीनों विज्ञान अकादमियों (आईएएससी, आईएनएसए और एनएएसआई) से उनके शोध योगदान के लिए पहले ही पुरस्कार और मान्यताएँ मिल चुकी हैं। उन्हें नियमित रूप से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय

By Dr. Rajesh Wadhwa

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