सात दिवसीय भव्य मेले का आज समापन हुआ। श्याम मेले में करीब पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन।
राजस्थान के जिला कोटपुतली-बहरोड़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल रेवाड़ी के सीमावर्ती जैतपुर धाम में आयोजित श्री श्याम मेले ने इस वर्ष ऐतिहासिक सफलता हासिल की। खाटू के बाद क्षेत्र का सबसे बड़ा और सफल मेला माना जा रहा यह आयोजन आस्था, व्यवस्था और जनसहयोग का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा। एकादशी के पावन अवसर पर एक ही दिन में पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के दरबार में हाजिरी लगाकर दर्शन किए। ग्यारस के दिन और रात लगातार श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही और पूरा धाम “श्याम नाम” के जयकारों से गूंजता रहा।
मेले के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ी। प्रशासन द्वारा व्यापक और सुदृढ़ व्यवस्थाएं की गईं। जिला पुलिस उपाधीक्षक सुरेश खींची, बहरोड़ के सीओ डीएसपी सचिन शर्मा, तहसीलदार अर्जुन लाल तथा मांढन थानाधिकारी किरण सिंह मय जाप्ता पूरे समय मौके पर मौजूद रहे और सुरक्षा व्यवस्था का सतत निरीक्षण करते रहे। पुलिस बल ने भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सा विभाग की टीमों ने स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं, वहीं बिजली विभाग ने निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की। स्काउट गाइड के स्वयंसेवकों ने भी श्रद्धालुओं की सेवा में बढ़-चढ़कर सहयोग दिया।
ताराचंद यादव, अध्यक्ष श्री श्याम सेवा समिति जैतपुर धाम, ने मेले की सफलता पर समस्त प्रशासन, पुलिस विभाग, चिकित्सा विभाग, बिजली विभाग, स्काउट गाइड, पत्रकार बंधुओं तथा अन्य सभी विभागों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “खाटू के बाद बाबा श्याम का इतना विशाल और सफल मेला आयोजित होना सभी के सामूहिक सहयोग और बाबा के आशीर्वाद का ही परिणाम है।” उन्होंने समस्त श्याम सेवा समिति जैतपुर धाम और ग्रामवासियों के योगदान को भी सराहा।
पूरे गांव जैतपुर धाम के लोगों ने तन-मन-धन से सहयोग किया। सरपंच अर्जुन सिंह, सरपंच भोला राम, पंकज फौजी, साहिल, संदीप, अन्नू, पुजारी श्याम चरण सहित समस्त ग्रामवासी मेले के दौरान व्यवस्थाओं में सक्रिय रूप से जुटे रहे। गांववासियों की एकजुटता और सेवा भाव ने मेले को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद व्यवस्था सुचारु और अनुशासित रही, जिससे यह मेला खाटू के बाद क्षेत्र का सबसे सफल और भव्य आयोजन सिद्ध हुआ। जैतपुर धाम में उमड़ा यह आस्था का सैलाब आने वाले वर्षों के लिए एक नई मिसाल बन गया है।

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