केयू एआईएच विभाग द्वारा पत्थर के औजार, मिट्टी के बर्तन और पुरावशेष पर कार्यशाला का उद्घाटन
कुरुक्षेत्र, 22 जनवरी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में केयू प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग में पत्थर के औजार, मिट्टी के बर्तन और पुरावशेष विषय पर 6 दिवसीय कार्यशाला के शुभारम्भ अवसर पर कुवि कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल ने बतौर मुख्यातिथि कहा कि भारतीय इतिहास एवं संस्कृति के संरक्षण में पुरातत्व की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि पुरातत्व न केवल अतीत की भौतिक साक्ष्यों की खोज करता है, बल्कि उनके संरक्षण और व्याख्या के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक पहचान को भी सुरक्षित रखता है। उन्होंने कहा हमें अपनी भारतीय संस्कृति, इतिहास के बारे में पुरातत्व एवं वैज्ञानिकता के आधार पर प्रचलित ऐतिहासिक गलतफहमियों को दूर करना होगा।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विभाग के अध्यक्ष और कार्यशाला के संयोजक डॉ. भगत सिंह ने की, उन्होंने कहा कि कार्यशालाएं विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करती है। सह-संयोजक डॉ. राजपाल ने ऐसी कार्यशालाओं को निरंतर आयोजित करने की बात कही।
कार्यशाला के पहले शैक्षणिक व्याख्यान डॉ. बनानी भट्टाचार्य, पूर्व उप निदेशक, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग, हरियाणा ने पुरातत्व के विकास और प्रमुख शाखाओं पर चर्चा की। वहीं राहुल द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने का एक व्यावहारिक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें सिरेमिक तकनीक का व्यावहारिक अनुभव दिया गया। इस अवसर पर शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
