डॉ. दलीप गोसाईं, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र एवं डेयरी प्रशिक्षण केंद्र, एनडीआरआई ने पहाड़ी क्षेत्रों में उन्नत खेती व दुग्ध उत्पादन से आय बढ़ाने के दिए सुझाव
करनाल 22 जनवरी।
कृषि एवं पशुपालन की आधुनिक तकनीकों को समझने के उद्देश्य से मंडी जिले के विभिन्न ब्लॉकों से आए किसानों एवं ग्रामीण महिलाओं के एक दल ने राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) तथा भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) का शैक्षणिक भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान किसानों को उन्नत खेती, बीज चयन, उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक पद्धतियों तथा पशुपालन से आय वृद्धि के व्यावहारिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।
इस अवसर पर किसानों एवं कृषि क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं के साथ चर्चा करते हुए डॉ. दलीप गोसाईं, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र एवं डेयरी प्रशिक्षण केंद्र, एनडीआरआई ने पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आमदनी में सुधार की संभावनाओं पर विस्तार से मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी के अनुरूप फसलों की उन्नत किस्में और सही तकनीक अपनाकर बेहतर उपज प्राप्त की जा सकती है।
डॉ. गोसाईं ने किसानों को आलू, प्याज़, लहसुन, मटर, सरसों तथा गेहूँ की उन्नत किस्मों के साथ-साथ व्यावहारिक खेती तकनीकों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर लागत कम होती है, उत्पादन बढ़ता है और बाजार में बेहतर गुणवत्ता मिलने से किसानों को अधिक लाभ प्राप्त होता है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे जहां तक संभव हो उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीजों का उपयोग करें और आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, ताकि उत्पादकता में वृद्धि कर आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बन सकें।
भ्रमण के दौरान दुग्ध उत्पादन को मजबूत बनाने के लिए उच्च नस्ल की जर्सी गायों के संरक्षण एवं पालन पर भी विशेष जोर दिया गया। डॉ. गोसाईं ने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में आयोजित एक पशु मेले में एक जर्सी गाय ने 24 घंटे में 42 लीटर दूध उत्पादन कर यह सिद्ध किया कि श्रेष्ठ नस्ल और बेहतर प्रबंधन से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में भी यदि सही देखभाल, संतुलित आहार और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाया जाए तो डेयरी व्यवसाय किसानों के लिए स्थायी आमदनी का मजबूत साधन बन सकता है।
दल के साथ आईं तारावती ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे वर्ष 2014 में भी एनडीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण हेतु आई थीं। उन्होंने कहा कि उस समय सिखाई गई तकनीकों को अपनाने के बाद उनकी जर्सी गाय अच्छा दूध दे रही है। तारावती ने यह भी बताया कि उन्होंने एनडीआरआई से बासमती धान का बीज लेकर अपने क्षेत्र के बल ब्लॉक में खेती की थी, जो सफल रही और उन्हें अच्छा परिणाम मिला।
डॉ. गोसाईं ने दल के सदस्यों को आश्वस्त किया कि निकट भविष्य में उन्हें सरसों एवं गेहूँ के बीज परीक्षण के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि किसान नई किस्मों को अपने क्षेत्र की परिस्थितियों में आजमाकर बेहतर विकल्प चुन सकें। इस शैक्षणिक भ्रमण में दल की ओर से विशेष रूप से विजय कुमार, भावना, तारादेवी एवं गिरिजा कुमारी उपस्थित रहीं।

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