हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा की “मनमानी” पर सख्ती, अब हर सदस्य को रिकॉर्ड देखने का अधिकार – जुडिशियल कमीशन
करनाल : हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एचएसजीपीसी) के प्रबंधों को सुचारू रूप से चलाने और अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा की कथित मनमानी पर रोक लगाने के उद्देश्य से सीनियर उपाध्यक्ष गुरमीत सिंह रामसर द्वारा हरियाणा सिख गुरुद्वारा जुडिशियल कमीशन में केस दायर किया गया था। इस मामले की सुनवाई चंडीगढ़ सेक्टर-17 स्थित गुरुद्वारा जुडिशियल कमीशन कार्यालय में हुई, जहां कमिश्नर दर्शन सिंह जौड़ा ने 16 जनवरी 2026 को आदेश पारित किए। आदेश के तहत अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा को बड़े फंडों की मनमर्जी से उपयोग करने से रोक दिया गया है। इसके साथ ही कमीशन ने कमेटी के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिए कि कमेटी का कोई भी सदस्य जब चाहे कार्यालय रिकॉर्ड देख सकता है।
मीडिया को जानकारी देते हुए कमेटी के सीनियर सदस्य सरदार दीदार सिंह नलवी ने कहा कि अध्यक्ष झींडा द्वारा “डिक्टेटरशिप” की जा रही है, जिससे कमेटी का माहौल खराब हो चुका है और प्रबंध डगमगा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से 2020 के दौरान भी जब झींडा अध्यक्ष रहे, तब कई बार एग्जीक्यूटिव मीटिंगों में कोरम पूरा नहीं होता था, और कार्रवाई रजिस्टर सदस्यों के घर भिजवा कर हस्ताक्षर करवा लिए जाते थे।
दीदार सिंह नलवी ने दावा किया कि वर्तमान कार्यकाल में भी झींडा की तीन एग्जीक्यूटिव और तीन जनरल हाउस मीटिंगें फेल हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 7 जनवरी को बजट इजलास में 49 सदस्यों में से 33 सदस्यों के टू-थर्ड बहुमत की जगह केवल 28 सदस्य मौजूद थे, इसके बावजूद बजट पास होने की घोषणा कर दी गई।
नलवी के अनुसार, 8 जनवरी को कार्यालय का रजिस्टर कथित रूप से गैरकानूनी ढंग से गाड़ी में रखकर सदस्यों के घर ले जाकर अगले दिन हस्ताक्षर करवाए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ऐसे सदस्यों के भी हस्ताक्षर कराए गए जो 7 जनवरी को कुरुक्षेत्र में नहीं, बल्कि गुरुद्वारा नाड़ा साहिब, पंचकूला में मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि झींडा द्वारा मीडिया में यह बयान दिया गया कि जथेदार बलजीत सिंह दादूवाल को सर्वसम्मति से धर्म प्रचार चेयरमैन पद से हटाने का प्रस्ताव पास किया गया है, लेकिन जब जुडिशियल कमीशन ने रजिस्टर जांचा तो उसमें ऐसा कोई प्रस्ताव दर्ज नहीं था।
दीदार सिंह नलवी ने बताया कि जुडिशियल कमीशन ने सुनवाई के दौरान 49 सदस्यों को बुलाया था, लेकिन झींडा ग्रुप का कोई भी सदस्य कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। केवल राजपाल सिंह, नरिंदर सिंह और सतपाल सिंह डाचर नामक तीन कार्यालय कर्मचारी ही पहुंचे।
उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान जथेदार बलजीत सिंह दादूवाल ने कहा कि यदि झींडा द्वारा भेजे गए कर्मचारी शपथ लेकर यह कह दें कि 7 जनवरी को कोरम पूरा था, तो वे केस वापस लेने को तैयार हैं। लेकिन जब जुडिशियल कमीशन ने कर्मचारी सतपाल सिंह डाचर से शपथ लेकर कोरम पूरा होने की बात कहने को पूछा, तो उन्होंने शपथ लेने से इनकार कर दिया।
जुडिशियल कमीशन ने मामले में अगली सुनवाई की तारीख 29 जनवरी तय करते हुए निर्देश दिए कि बजट इजलास वाले दिन का पूरा वीडियो रिकॉर्ड और फोटोग्राफी कुरुक्षेत्र दीवान हॉल से प्रस्तुत की जाए, साथ ही गुरुद्वारा नाड़ा साहिब पंचकूला की सीसीटीवी फुटेज भी पेश की जाए। कमीशन ने चेतावनी दी कि यदि रिकॉर्ड के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ हुई तो चीफ सेक्रेटरी और नाड़ा साहिब के मैनेजर को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
नलवी ने कहा कि जुडिशियल कमीशन ने कर्मचारियों को निष्पक्ष रूप से ड्यूटी करने की हिदायत दी है और पक्षपात करने पर फटकार लगाई है। उन्होंने मांग की कि झींडा का “झूठ सामने आ चुका है और उन्हें नैतिकता के आधार पर तुरंत अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहिए।

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