अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में देश-विदेश के विद्वतजन, बुद्धिजीवी सरस्वती नदी को लेकर करेंगे मंथन
हरियाणा के मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती, कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा व सरस्वती बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच की होगी गरिमामयी उपस्थिति
केयू सरस्वती शोध उत्कृष्टता केन्द्र
कुरुक्षेत्र, 14 जनवरी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में हरियाणा सरस्वती हैरिटेज डेवलेपमेंट बोर्ड, पंचकुला व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय सरस्वती शोध उत्कृष्टता केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में पवित्र नदी सरस्वती को लेकर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन 20 जनवरी से केयू सीनेट हॉल व ऑडिटोरियम हॉल में किया जाएगा। इस अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में देश-विदेश के विद्वतजन एवं बुद्धिजीवी ‘सरस्वती नदी – भारतीय ज्ञान प्रणाली और संस्कृति की जननी’ विषय पर मंथन करेंगे। इस अवसर पर हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, हरियाणा सरस्वती विरासत विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच तथा बोर्ड के सीईओ डॉ. कुमार सुप्रविन की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
यह जानकारी देते हुए केयू सरस्वती शोध उत्कृष्टता केन्द्र के निदेशक एवं केयू छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवं जियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. एआर चौधरी ने बताया कि भारतवर्ष में सरस्वती नदी की आध्यात्मिकता एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अहम पहचान रही है। इसका उल्लेख वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि पौराणिक भारतीय साहित्य में मिलता है। वहीं ऋग्वेद में, सरस्वती नदी को पवित्र एवं सबसे बड़ी नदी भी बताया गया है। उन्होंने बताया कि पवित्र सरस्वती नदी पर मंथन एवं चिंतन के लिए केयू में आयोजित होने वाली इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में सनातन और सरस्वती, धरातल पर सरस्वती, सरस्वती नदी के वैज्ञानिक प्रमाण, सरस्वती नदी चैनल में नियमित प्रवाह बनाए रखने की रणनीतियों, पर्यावरण और सरस्वती, सप्त-सिंधु सरस्वती, सरस्वती के उद्गम स्थल, सरस्वती नदी के आस-पास जैवविविधता सहित सरस्वती नदी के पैलियो चैनल द्वारा बाढ़ को नियंत्रित करने तथा भूमिगत जल को रिचार्ज करने आदि विषयों पर प्रतिभागी एवं शोधार्थी अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत करेंगे।
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कांफ्रेंस के सफल आयोजन के लिए कमेटियां गठित
केन्द्र के निदेशक प्रो. एआर चौधरी ने बताया कि इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के सफल आयोजन के लिए विभिन्न कमेटियों का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस कांफ्रेंस के को-कंवीनर लक्ष्य बिंद्रा, आयोजन सचिव में अरविन्द कौशिक, डॉ. लक्ष्मी गुप्ता, डॉ. दीपा नथालिया, सदस्यों में डॉ. वीएमके पुरी, डॉ. एके गुप्ता, प्रो. मोहिन्द्र चांद, डॉ. आर भास्कर, डॉ. वरूण जोशी, प्रो. सुनील ढींगरा, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. विनोद कुमार, प्रो. प्रीति जैन, प्रो. महासिंह पूनिया, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, प्रो. विवेक चावला, डॉ. सलोनी दीवान सहित केयू शिक्षक एवं कर्मचारी शामिल हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती, कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा व सरस्वती बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच की होगी गरिमामयी उपस्थिति
केयू सरस्वती शोध उत्कृष्टता केन्द्र
कुरुक्षेत्र, 14 जनवरी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में हरियाणा सरस्वती हैरिटेज डेवलेपमेंट बोर्ड, पंचकुला व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय सरस्वती शोध उत्कृष्टता केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में पवित्र नदी सरस्वती को लेकर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन 20 जनवरी से केयू सीनेट हॉल व ऑडिटोरियम हॉल में किया जाएगा। इस अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में देश-विदेश के विद्वतजन एवं बुद्धिजीवी ‘सरस्वती नदी – भारतीय ज्ञान प्रणाली और संस्कृति की जननी’ विषय पर मंथन करेंगे। इस अवसर पर हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, हरियाणा सरस्वती विरासत विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच तथा बोर्ड के सीईओ डॉ. कुमार सुप्रविन की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
यह जानकारी देते हुए केयू सरस्वती शोध उत्कृष्टता केन्द्र के निदेशक एवं केयू छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवं जियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. एआर चौधरी ने बताया कि भारतवर्ष में सरस्वती नदी की आध्यात्मिकता एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अहम पहचान रही है। इसका उल्लेख वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि पौराणिक भारतीय साहित्य में मिलता है। वहीं ऋग्वेद में, सरस्वती नदी को पवित्र एवं सबसे बड़ी नदी भी बताया गया है। उन्होंने बताया कि पवित्र सरस्वती नदी पर मंथन एवं चिंतन के लिए केयू में आयोजित होने वाली इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में सनातन और सरस्वती, धरातल पर सरस्वती, सरस्वती नदी के वैज्ञानिक प्रमाण, सरस्वती नदी चैनल में नियमित प्रवाह बनाए रखने की रणनीतियों, पर्यावरण और सरस्वती, सप्त-सिंधु सरस्वती, सरस्वती के उद्गम स्थल, सरस्वती नदी के आस-पास जैवविविधता सहित सरस्वती नदी के पैलियो चैनल द्वारा बाढ़ को नियंत्रित करने तथा भूमिगत जल को रिचार्ज करने आदि विषयों पर प्रतिभागी एवं शोधार्थी अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत करेंगे।
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कांफ्रेंस के सफल आयोजन के लिए कमेटियां गठित
केन्द्र के निदेशक प्रो. एआर चौधरी ने बताया कि इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के सफल आयोजन के लिए विभिन्न कमेटियों का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस कांफ्रेंस के को-कंवीनर लक्ष्य बिंद्रा, आयोजन सचिव में अरविन्द कौशिक, डॉ. लक्ष्मी गुप्ता, डॉ. दीपा नथालिया, सदस्यों में डॉ. वीएमके पुरी, डॉ. एके गुप्ता, प्रो. मोहिन्द्र चांद, डॉ. आर भास्कर, डॉ. वरूण जोशी, प्रो. सुनील ढींगरा, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. विनोद कुमार, प्रो. प्रीति जैन, प्रो. महासिंह पूनिया, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, प्रो. विवेक चावला, डॉ. सलोनी दीवान सहित केयू शिक्षक एवं कर्मचारी शामिल हैं।
डिजीटल शिक्षा के दौर में एआई की भूमिका महत्वपूर्ण : प्रो. राकेश कुमार
केयू यूजीसी एमएमटीटीसी द्वारा डिजीटल शिक्षा के दौर में परिवर्तनकारी क्षमताओं पर हुआ मंथन
कुरुक्षेत्र, 14 जनवरी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में केयू यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा 32 वें आठ दिवसीय ऑनलाइन एनईपी अभिविन्यास और संवेदीकरण कार्यक्रम में 7वें दिन केयू डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार ने पहले सत्र में बतौर रिसोर्स पर्सन कहा कि डिजीटल शिक्षा के दौर में एआई की महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षण वातावरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकती है, क्योंकि यह छात्रों के लिए व्यक्तिगत सीखने के मार्ग तैयार करती है और वास्तविक समय में उनके सीखने के मूल्यांकन का भी आकलन करती है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित प्रणालियाँ छात्रों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप संसाधन उपलब्ध कराकर शैक्षिक अनुभव को समृद्ध करती हैं। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के उपयोग से न केवल शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि छात्रों के बीच विषयवस्तु की गहरी समझ भी विकसित होती है, जो भविष्य की शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
दूसरे सत्र की रिसोर्स पर्सन डॉ. शिवांगी, श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एनईपी के संदभ में शोध एवं विकास को लेकर नवीन शैक्षिक प्रथाओं को बढ़ावा देने और पाठ्यक्रम डिजाइन में सुधार करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए व्यवस्थित अनुसंधान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के समापन अवसर पर पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अंजू बाला ने केन्द्र की निदेशिका प्रो. प्रीति जैन की ओर से सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
केयू यूजीसी एमएमटीटीसी द्वारा डिजीटल शिक्षा के दौर में परिवर्तनकारी क्षमताओं पर हुआ मंथन
कुरुक्षेत्र, 14 जनवरी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में केयू यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा 32 वें आठ दिवसीय ऑनलाइन एनईपी अभिविन्यास और संवेदीकरण कार्यक्रम में 7वें दिन केयू डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार ने पहले सत्र में बतौर रिसोर्स पर्सन कहा कि डिजीटल शिक्षा के दौर में एआई की महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षण वातावरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकती है, क्योंकि यह छात्रों के लिए व्यक्तिगत सीखने के मार्ग तैयार करती है और वास्तविक समय में उनके सीखने के मूल्यांकन का भी आकलन करती है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित प्रणालियाँ छात्रों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप संसाधन उपलब्ध कराकर शैक्षिक अनुभव को समृद्ध करती हैं। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के उपयोग से न केवल शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि छात्रों के बीच विषयवस्तु की गहरी समझ भी विकसित होती है, जो भविष्य की शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
दूसरे सत्र की रिसोर्स पर्सन डॉ. शिवांगी, श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एनईपी के संदभ में शोध एवं विकास को लेकर नवीन शैक्षिक प्रथाओं को बढ़ावा देने और पाठ्यक्रम डिजाइन में सुधार करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए व्यवस्थित अनुसंधान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के समापन अवसर पर पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अंजू बाला ने केन्द्र की निदेशिका प्रो. प्रीति जैन की ओर से सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
