-शोध और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा, कुलपति बोले-विकसित भारत की संकल्पना में महत्वपूर्ण पहल
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र और एसजीटी यूनिवर्सिटी गुरुग्राम के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान की अगुवाई में संपन्न हुआ। समझौते पर डीन, एफआईएमएस (एसजीटी यूनिवर्सिटी गुरुग्राम) प्रो. अनिल शर्मा तथा श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कार्यकारी कुलसचिव विकास शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. रणधीर सिंह, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. विदुषी त्यागी, डीन ऑफ आयुर्वेदा प्रो. सीमा रानी, आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला, प्रो. रवि राज, प्रो. कृष्ण कुमार व उप कुलसचिव अतुल गोयल उपस्थित रहें।
बता दें कि इस एमओयू के अंतर्गत दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक, अनुसंधान एवं परीक्षण से संबंधित संसाधनों का पारस्परिक आदान-प्रदान किया जाएगा। इसके तहत श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी एसजीटी यूनिवर्सिटी के आयुर्वेद संकाय की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे, वहीं एसजीटी यूनिवर्सिटी के शिक्षक एवं विद्यार्थी आयुष विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि इस समझौते से दोनों संस्थानों के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का बौद्धिक, शैक्षणिक एवं व्यावसायिक उत्थान होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सहयोग से अनुसंधान की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा तथा नवाचार के माध्यम से भारतीय विज्ञान परंपरा, विशेषकर आयुष पद्धतियों को वैश्विक मंच पर नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जा सकेगा। यह कदम ‘विकसित भारत’ और ‘विश्वगुरु भारत’ की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
डीन एफआईएमएस प्रो. अनिल शर्मा ने बताया कि दोनों संस्थानों की उपलब्ध इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रिसर्च सुविधाओं का आपसी साझा उपयोग किया जाएगा। इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों को अत्याधुनिक शोध संसाधनों का लाभ मिलेगा और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को गति मिलेगी। यह समझौता आयुष शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में नए अवसर सृजित करेगा और दोनों विश्वविद्यालयों के बीच दीर्घकालिक अकादमिक सहयोग की मजबूत नींव रखेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *